नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
मुंबई। अभिनेता आमिर खान की तीसरी शादी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे द्वारा आमिर खान पर की गई टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे निजी जीवन में अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप करार दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता चरण सिंह सपरा ने नितेश राणे के बयान पर हमला बोलते हुए कहा कि आमिर खान केवल बहाना हैं, जबकि असली उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि अगर किसी की निजी जिंदगी को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
सपरा ने आगे कहा कि नितेश राणे एक मंत्री हैं और उन्हें महाराष्ट्र के विकास, जनहित और प्रशासनिक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि विवादित बयान देकर राजनीतिक माहौल को गर्म करना चाहिए। उन्होंने राणे के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें आमिर खान को "लव जिहाद का ब्रांड एंबेसडर" बताया गया था। कांग्रेस नेता ने पलटवार करते हुए कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले यह भी देखना चाहिए कि कहीं नफरत फैलाने की राजनीति तो नहीं की जा रही।
इस विवाद की शुरुआत आमिर खान की अपनी लंबे समय की मित्र गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी की खबरों के बाद हुई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नितेश राणे ने आमिर खान को निशाने पर लिया और उनके विवाह को लेकर विवादित टिप्पणी की। इसके बाद कांग्रेस ने राणे के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला और राजनीतिक लाभ के लिए निजी मामलों का इस्तेमाल बताया।
इसी दौरान कांग्रेस प्रवक्ता चरण सिंह सपरा ने अयोध्या राम मंदिर चंदा गड़बड़ी के कथित मामले को लेकर भी भाजपा और मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल चंदे की चोरी नहीं, बल्कि बड़े स्तर का आर्थिक घोटाला है, जिसकी चर्चा पिछले कई वर्षों से होती रही है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में पहले भी कई लोगों ने अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया था, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सपरा ने कहा कि निर्मोही अखाड़े सहित कई लोगों ने समय-समय पर इस मामले में आवाज उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि लेखा प्रभारी महिपाल सिंह और पूर्व इंजीनियर विनय नाथ वर्मा ने भी निर्माण कार्य और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस नेता का कहना है कि इन शिकायतों के बावजूद संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी होने के बावजूद राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख पदाधिकारियों के नाम प्राथमिकी में शामिल क्यों नहीं किए गए। पार्टी ने एसआईटी की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए इसे केवल औपचारिक कार्रवाई बताया और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की मांग दोहराई।







