Ad Image
Ad Image
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा || दिल्ली को मिली फिर साफ हवा, AQI 220 पर पहुंचा || PM मोदी ने भारतरत्न अटल जी और मालवीय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया || युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती आज

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

इलाज होने के बाद भी बेटे ने मां को घर ले जाने से किया इनकार

स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।

कोलकाता: महानगर के एक निजी अस्पताल से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां इलाज पूरा होने के बावजूद एक बेटे ने अपनी बुजुर्ग मां को घर ले जाने से साफ इनकार कर दिया। पिछले करीब 10 महीनों से अस्पताल में भर्ती महिला अब स्वस्थ बताई जा रही हैं, लेकिन बेटे की जिद के कारण वह अब भी अस्पताल के बेड पर रहने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार, महिला को पैर की हड्डी टूटने और उम्र से जुड़ी अन्य बीमारियों के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि इलाज पूरा हो चुका है और मरीज को अब घर ले जाया जा सकता है। इसके बावजूद बेटे अमित भादुड़ी ने मां को घर ले जाने से मना कर दिया।

बेटे का तर्क है कि वह अस्पताल का पूरा खर्च दे रहा है, इसलिए अस्पताल को इस बात पर दबाव नहीं बनाना चाहिए कि मां को घर ले जाया जाए। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक बेड लंबे समय से घिरे रहने के कारण अन्य गंभीर मरीजों को परेशानी हो रही है।

मामला स्वास्थ्य आयोग तक पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान भी बेटे ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई। इस पर आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अस्पताल कोई होटल या वृद्धाश्रम नहीं है, जहां भुगतान कर अनिश्चितकाल तक मरीज को रखा जाए।

स्वास्थ्य आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 28 फरवरी तक बुजुर्ग महिला को हर हाल में घर ले जाया जाए। आयोग का कहना है कि इलाज पूरा होने के बाद अस्पताल में बेड रोके रखना नियमों के खिलाफ है।

यह घटना समाज में बदलते रिश्तों और जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, जहां देखभाल की जगह केवल आर्थिक जिम्मेदारी को ही पर्याप्त समझा जाने लगा है।