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इस्तीफे के बाद दिल्ली के लिए रवाना सिद्दारमैया, राहुल से करेंगे मुलाकात

नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद राज्य की सियासी हलचल तेज हो गई। उनके इस्तीफे के बाद राज्य के कई हिस्सों में समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। बेंगलुरु स्थित उनके आधिकारिक आवास ‘कावेरी’ के बाहर बड़ी संख्या में समर्थक जुटे और उनसे इस्तीफा वापस लेने की मांग की। इस दौरान कई जगहों पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया, नारेबाजी हुई और सड़क जाम करने की कोशिशें भी की गईं।

इस्तीफे के बाद सिद्धारमैया दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहां उनकी राहुल गांधी से मुलाकात प्रस्तावित बताई गई। हालांकि, खराब मौसम और तेज आंधी के कारण उनकी फ्लाइट को जयपुर में उतारना पड़ा। इसी बीच, यह चर्चा भी सामने आई कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा सीट और दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया और कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय बने रहने की इच्छा जताई।

उनके इस्तीफे के बाद डी.के. शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं, हालांकि पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया का इस्तीफा पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच आया है। इस्तीफे के बाद बेंगलुरु, शिवमोगा, यादगिर और कलबुर्गी समेत कई स्थानों पर समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच भावुक माहौल देखने को मिला।

‘अहिंदा’ (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित) समुदाय से जुड़े संगठनों ने भी इस फैसले का विरोध किया। उनका कहना है कि सिद्धारमैया ने इन वर्गों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं और उन्हें पद से हटाया जाना उचित नहीं है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठाए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से राज्यसभा सीट और दिल्ली में बड़ी भूमिका की पेशकश की गई थी, लेकिन सिद्धारमैया ने राष्ट्रीय राजनीति में जाने के बजाय राज्य की राजनीति में सक्रिय रहने को प्राथमिकता दी।

वहीं, इस्तीफे के बाद डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि विधायक दल की बैठक के बाद इस संबंध में औपचारिक घोषणा की जा सकती है, जिससे राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें और तेज हो गई हैं।