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ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव बने पूर्व कमांडर रेजाई

विदेश डेस्क, ऋषि राज।

तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई को देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एसएनएससी) का सचिव नियुक्त किया है। रेजाई ने मोहम्मद बाक़र जुलकद्र की जगह ली है, जो मार्च से इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

71 वर्षीय रेजाई ईरान के अनुभवी सैन्य कमांडर और प्रशासनिक क्षेत्र के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। आईआरजीसी में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने देश के राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। उनकी नई नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब ईरान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर विचार करने वाली प्रमुख संस्थाओं में से एक है। ऐसे में रेजाई की नियुक्ति को देश की मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिषद के सचिव के तौर पर उनके सामने सुरक्षा, विदेश नीति और क्षेत्रीय घटनाक्रमों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर समन्वय की जिम्मेदारी होगी।

ईरान इस समय पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अपनी सुरक्षा और रणनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर लगातार फैसले ले रहा है। अमेरिका के साथ उसके संबंध भी तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं।

रेजाई की सैन्य पृष्ठभूमि को देखते हुए उनकी नियुक्ति को ईरान की सुरक्षा नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आईआरजीसी के पूर्व कमांडर के रूप में उनका लंबा अनुभव रहा है और वह देश की सुरक्षा व्यवस्था तथा रणनीतिक मामलों से अच्छी तरह परिचित हैं।

मोहम्मद बाक़र जुलकद्र की जगह रेजाई को जिम्मेदारी दिए जाने से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कामकाज में नया नेतृत्व आया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेजाई इस पद पर रहते हुए ईरान की सुरक्षा चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय दबावों से किस तरह निपटते हैं।

ईरान के लिए यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश को एक ओर क्षेत्रीय परिस्थितियों से निपटना है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। रेजाई के अनुभव का इस्तेमाल इन मुद्दों पर रणनीतिक फैसलों में किए जाने की संभावना है।