विदेश डेस्क, ऋषि राजI
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के कथित परमाणु खतरे से न केवल अपने सहयोगियों बल्कि यूरोप को भी बचाने का प्रयास कर रहा है। ट्रंप ने एक ब्रिटिश पत्रकार से बातचीत के दौरान ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो यूरोप के लिए स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।
श्री ट्रंप ने कहा कि वह ब्रिटेन को भी इस खतरे से बचा रहे हैं और उनका मानना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होने की स्थिति में वह अमेरिका की तुलना में यूरोप के खिलाफ उनका इस्तेमाल करने के लिए अधिक तत्पर हो सकता है। उन्होंने इस संदर्भ में यूरोप की भौगोलिक स्थिति और ईरान की मिसाइल क्षमताओं का उल्लेख किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार ईरान के पास ऐसी मिसाइल क्षमता मौजूद है, जिसकी पहुंच यूरोप के कई हिस्सों तक हो सकती है। इसी कारण वह ईरान की परमाणु गतिविधियों को केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं मानते, बल्कि इसे यूरोपीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ विषय बताते हैं।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से परमाणु गतिविधियों, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर मतभेद रहे हैं। अमेरिका लगातार ईरान की परमाणु क्षमता को सीमित करने पर जोर देता रहा है, जबकि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अलग रुख रखता है।
श्री ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह भी संकेत दिया कि अमेरिका की सुरक्षा नीति का उद्देश्य केवल अमेरिकी नागरिकों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने ईरान की संभावित परमाणु क्षमता को यूरोप के लिए गंभीर चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार मौजूद होते, तो स्थिति काफी अलग होती। उनके अनुसार ईरान के पास यूरोप तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता होने के कारण यूरोपीय देशों को भी इस खतरे को गंभीरता से लेना चाहिए।
ट्रंप के बयान से एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिमी देशों की सुरक्षा चिंताओं को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी ईरान की परमाणु गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।







