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ईरान ने ट्रंप के दावे को नकारा, समझौते पर अभी फैसला नहीं

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अंतिम करार पर अभी मुहर नहीं लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते के अंतिम चरण में होने और जल्द हस्ताक्षर किए जाने के दावे के बाद ईरान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वार्ता जारी है, लेकिन अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि समझौते को लेकर मीडिया में चल रही कई खबरें केवल अटकलों पर आधारित हैं और अंतिम निर्णय अभी शेष है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान ने किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति हुई है और समझौते का बड़ा हिस्सा तैयार भी किया जा चुका है, लेकिन कुछ अहम विषयों पर अभी भी सहमति बननी बाकी है। बघाई ने कहा कि शुरुआत से ही ईरान की स्थिति स्पष्ट रही है और उसने अपने राष्ट्रीय हितों तथा निर्धारित सीमाओं को ध्यान में रखते हुए ही वार्ता को आगे बढ़ाया है। उनके अनुसार, ईरान अपनी तय ‘रेड लाइन्स’ से किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटेगा।

प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कतर और पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं तथा दोनों देशों ने वार्ता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पक्ष कई बार अपने रुख में बदलाव करता रहा है, जिससे कूटनीतिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है। बघाई का कहना था कि समझौते की दिशा में बातचीत जारी है, लेकिन किसी भी अंतिम निर्णय की घोषणा करना अभी जल्दबाजी होगी।

क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। बघाई ने कहा कि हाल के दिनों में अमेरिकी गतिविधियों के कारण इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि पहले की तुलना में अब यह क्षेत्र कम सुरक्षित महसूस किया जा रहा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक “बेहतरीन समझौता” हो चुका है, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने में मदद करेगा। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि समझौते के अधिकांश दस्तावेज तैयार हैं और अब केवल औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जानी है। उन्होंने संकेत दिया कि अगले कुछ दिनों में यूरोप में इस पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में कभी परमाणु हथियार विकसित न कर सके।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे दावा किया कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को आधिकारिक रूप से खोला जाएगा और क्षेत्र में स्थिरता बहाल होगी। उन्होंने संभावना जताई कि इस प्रक्रिया में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हो सकते हैं। ट्रंप के अनुसार, समझौते से वैश्विक बाजारों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और तेल की कीमतों में कमी आने से अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है। हालांकि ईरान की ओर से आई प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी है और अंतिम समझौते की घोषणा फिलहाल नहीं की जा सकती।

इस बीच ओमान तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले को लेकर भी ईरान ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। इस्माइल बघाई ने भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि भारतीय वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई अमेरिका की कथित ‘राज्य प्रायोजित समुद्री डकैती’ और ‘सशस्त्र लूट’ की नीति को दर्शाती है। उन्होंने मारे गए भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। बघाई ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियां न केवल समुद्री मार्गों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती पैदा करती हैं।