Ad Image
Ad Image
युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप || बिहार: विजय कुमार सिन्हा, निशांत कुमार, दिलीप जायसवाल, दीपक प्रकाश समेत 32 ने ली शपथ || बिहार में सम्राट सरकार का विस्तार, 32 मंत्रियों ने ली पद और गोपनीयता की शपथ || वोट चोरी का जिन्न फिर निकला, राहुल गांधी का EC और केंद्र सरकार पर हमला || वियतनामी राष्ट्रपति तो लाम पहुंचे भारत, राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक स्वागत || टैगोर जयंती पर 9 मई को बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण की संभावना || केरल में सरकार गठन की कवायद तेज: अजय माकन और मुकुल वासनिक पर्यवेक्षक || असम में बीजेपी जीत के हैट्रिक की ओर, 101 से अधिक पर बढ़त, कांग्रेस 23 पर सिमटी || पांच राज्यों में मतगणना जारी: बंगाल, असम में भाजपा को बढ़त, केरल में कांग्रेस और तमिलनाडु में टीवीके को बढ़त || तमिलनाडु चुनाव: एक्टर विजय की टीवीके ने किया उलटफेर, 109 सीटो पर बढ़त

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता में प्रगति, शांति समाधान की उम्मीद बढ़ी

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई परमाणु वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति हुई है और इससे क्षेत्र में स्थिरता तथा शांति की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। उन्होंने यह टिप्पणी हाल ही में ओमान की राजधानी मस्कट में हुए अप्रत्यक्ष संवाद के संदर्भ में की, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि ये वार्ताएं पश्चिम एशिया क्षेत्र में मित्रवत देशों के सहयोग और निरंतर प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा से विवादों को बातचीत और कूटनीतिक रास्तों से सुलझाने का पक्षधर रहा है। उनका मानना है कि संवाद ही स्थायी समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है।

इसी दौरान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी वार्ता को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान पर किसी भी तरह का दबाव स्वीकार्य नहीं है और देश अपने रणनीतिक फैसले स्वतंत्र रूप से लेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से चले आ रहे तनाव में कमी आ सकती है। साथ ही वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की लंबी पृष्ठभूमि को देखते हुए ठोस परिणाम आने में समय लग सकता है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बातचीत पर नजर बनाए हुए है। कई देशों ने उम्मीद जताई है कि कूटनीतिक प्रयास सफल होंगे और इससे क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत होगी। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से संवाद जारी रखने की इच्छा व्यक्त की गई है, जिससे भविष्य में किसी व्यापक समझौते की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।