विदेश डेस्क, ऋषि राज |
मास्को: अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संभावित समझौते की खबरों ने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच ऐसी सहमति बनती दिख रही है जिसके तहत ईरान जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों से किसी प्रकार का अतिरिक्त टोल नहीं वसूलेगा। यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ सप्ताहों से बैक चैनल वार्ता चल रही थी। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाना था। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता औपचारिक रूप लेता है तो इससे वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आएगी और मध्य पूर्व में सैन्य तनाव घट सकता है। हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कई बार जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि शिपिंग प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर पड़ोसी देशों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है। हालांकि टोल को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत सकारात्मक माने जा रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन ने भी कहा है कि क्षेत्रीय शांति और मुक्त व्यापार को प्राथमिकता दी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं बल्कि कूटनीतिक तौर पर भी अहम होगा। इससे अमेरिका-ईरान संबंधों में नई शुरुआत की संभावना बन सकती है। अब दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर औपचारिक घोषणा होती है या नहीं।







