लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: ईश्वर अनेक प्रकार से हमारा मार्गदर्शन करते हैं और सत्य एवं सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं परंतु स्वार्थ,लालच व गलत सोच के कारण अथवा तात्कालिक समस्याओं में उलझे रहने के कारण व्यक्ति ईश्वरीय प्रेरणा के अनुरूप उचित निर्णय नहीं ले पाता है, जो व्यक्ति नम्रता के आधार पर सब से ताल मेल बनाए रख सकता है, वह महान है, जीवन भर आपके साथ रहने वाली एक मात्र चीज़ है,वो आप स्वयं हैं इसलिए अपने ऊपर वह बोझ न डालें जिसे आप सहन नहीं कर सकते हैं।
उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।भक्ति जब भुख में प्रवेश कर जाती है तो भुख व्रत बन जाती है,भक्ति जब पानी में प्रवेश कर जाती है तो पानी चरणामृत बन जाता है,भक्ति जब भोजन में प्रवेश कर जाती है तो भोजन प्रसाद बन जाता है,भक्ति जब यात्रा में प्रवेश कर जाती है तो यात्रा तीर्थ यात्रा बन जाती है,भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है तो संगीत कीर्तन बन जाता है,भक्ति जब घर में प्रवेश कर जाती है तो घर मंदिर बन जाता है। भक्ति जब कार्य में प्रवेश कर जाती है तो कार्य कर्म बन जाता है।
भक्ति जब व्यक्ति में प्रवेश कर जाती है तो व्यक्ति मानव बन जाता है। अपने भीतर दबी अनकही कहानी को सहन करना बड़ी पीड़ा है। हमें कहना सीखना चाहिए, कोशिश नहीं करेंगे तो आप जान ही नहीं पाएंगे कि आप कर सकते थे या नहीं, भलाई करना कर्तव्य नहीं आनंद है, क्योंकि यह स्वास्थ्य और सुख में वृद्धि करता है। यदि लक्ष्य मुश्किल लगने लगे,तो समस्या लक्ष्य में नहीं,आपके प्रयासों में है। मज़बूत इंसान जीतने के लिए मेहनत करते हैं,और कमज़ोर इंसान,दूसरों को हराने के लिए साज़िशें करते हैं।
जीवन एक यात्रा है,इसका भरपूर आनंद लेना चाहिए।







