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ऋषि कपूर का सपना: सिनेमा तिरंगे में चमका

एंटरटेनमेंट डेस्क, मुस्कान कुमारी।

नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा को पहली बार अलग टेबलो मिला, जो दिवंगत ऋषि कपूर के 2020 के सुझाव को साकार करता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और संजय लीला भंसाली की जोड़ी ने 'भारत गाथा' थीम पर यह ऐतिहासिक टेबलो बनाया, जो बॉलीवुड की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता।

ऋषि कपूर ने 2020 में सोशल मीडिया पर सरकार से अपील की थी कि सिनेमा को परेड में प्रमुख स्थान दिया जाए, जो लाखों दिलों की आवाज था। आज यह सपना हकीकत बन गया, जब राजपथ पर सिनेमा का टेबलो दौड़ा। भंसाली की कला ने इसे जीवंत बनाया, जहां पुरानी फिल्मों के आइकॉन्स से लेकर आधुनिक सुपरस्टार्स तक की झलक मिली।

भंसाली का जादू: सिनेमा की गाथा राजपथ पर

संजय लीला भंसाली, जिन्होंने पहली बार किसी फिल्म डायरेक्टर के रूप में ऐसा टेबलो लीड किया, ने कहा कि यह भारतीय सिनेमा की आत्मा का सम्मान है। टेबलो में 'मुगल-ए-आजम' से 'दंगल' तक की यात्रा दिखाई, जो देश की एकता, विविधता और ग्लोबल अपील को उजागर करती। दर्शकों में तालियां गूंजीं, जब टेबलो पर बॉलीवुड के गाने बजे और कलाकारों के चेहरे चमके।

यह टेबलो सिनेमा को राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनाता, जो ऋषि कपूर की दूरदृष्टि का नतीजा है। परेड में अन्य टेबलो के बीच यह चमका, जहां सांस्कृतिक धरोहर ने तिरंगे को सलाम किया।

ऋषि की पुकार: 2020 से आज तक का सफर

ऋषि कपूर ने ट्विटर पर लिखा था, "सिनेमा को परेड में जगह दो, यह भारत की सॉफ्ट पावर है।" उनकी मौत के बाद यह सुझाव भूला न गया। आज मंत्रालय ने इसे अमल में लाकर लाखों सिनेप्रेमियों का मन जीत लिया। भंसाली ने इसे 'भारत गाथा' नाम देकर सिनेमा की कहानी को महाकाव्य बना दिया।

टेबलो ने दिखाया कि कैसे बॉलीवुड ने दुनिया को भारतीय संस्कृति से जोड़ा - 'शोले' की धाय मां से 'पहेली' के रंग तक। यह सम्मान न सिर्फ सिनेमा का, बल्कि हर कलाकार का है, जो ऋषि की विरासत को जीवित रखता।

वैश्विक सम्मान: सिनेमा की ताकत उभरी

'भारत गाथा' टेबलो ने सिनेमा को सॉफ्ट पावर का प्रतीक बनाया, जो ओस्कर से कांस तक की यात्रा दर्शाता। भंसाली की टीम ने इसे इतने बारीक बनाया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। परेड में यह टेबलो अन्य राज्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चला, जो सांस्कृतिक एकता का संदेश देता।

ऋषि कपूर का सपना पूरा होने से परिवार और इंडस्ट्री में खुशी की लहर। यह घटना साबित करती कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का माध्यम है।