स्टेट डेस्क - वेरॉनिका राय
हैदराबाद: देश के 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बीच तेलंगाना के ग्राम पंचायत चुनावों से एक प्रेरक और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोकतंत्र में हर एक वोट की अहमियत होती है।
तेलंगाना के निर्मल जिले में हुए सरपंच चुनाव में एक महिला प्रत्याशी ने मात्र एक वोट से जीत हासिल की। इस जीत को खास बनाने वाली बात यह रही कि निर्णायक वोट उनकी ससुर ने डाला, जो सिर्फ वोट देने के लिए अमेरिका से अपने पैतृक गांव पहुंचे थे।
बहू के समर्थन में अमेरिका से पहुंचे ससुर
यह रोचक मामला निर्मल जिले के लोकेश्वरम मंडल के बागापुर ग्राम पंचायत का है। यहां सरपंच पद के लिए हुए चुनाव में मुत्याला श्रीदेवा ने अपनी प्रतिद्वंद्वी हरशस्वती को सिर्फ एक वोट से हराया। जब चुनाव परिणाम सामने आए तो गांव में यह चर्चा तेज हो गई कि श्रीदेवा के ससुर मुत्याला इंद्रकरण रेड्डी खास तौर पर अमेरिका से गांव आए थे, ताकि वे बहू के पक्ष में अपना वोट डाल सकें। ग्रामीणों ने इस वोट को “मतपत्र के रूप में मिला आशीर्वाद” बताया, जिसने बहू की जीत सुनिश्चित कर दी।
मतगणना ने दिखाया एक वोट का महत्व
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरपंच चुनाव में कुल 426 मतदाता थे, जिनमें से 378 लोगों ने मतदान किया।
* मुत्याला श्रीदेवा को 189 वोट मिले
* उनकी प्रतिद्वंद्वी हरशस्वती को 188 वोट मिले
* एक वोट अमान्य घोषित किया गया
इसी एक वोट के अंतर ने चुनाव का फैसला कर दिया और लोकतंत्र में हर वोट की ताकत को उजागर किया।
स्थानीय राजनीति से जुड़ा रहा है परिवार
चार दिन पहले गांव पहुंचे इंद्रकरण रेड्डी स्थानीय राजनीति में कोई नया नाम नहीं हैं। वे स्वयं भी पहले सरपंच रह चुके हैं। वर्ष 2013 में उनकी भतीजी सरपंच बनी थीं और अब उनकी बहू ने यह जिम्मेदारी संभाली है, जिससे परिवार की स्थानीय राजनीतिक विरासत आगे बढ़ी है।
लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की मजबूत मिसाल
यह “वन वोट विक्ट्री” का मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। यह घटना एक सशक्त संदेश देती है कि चुनाव चाहे छोटा हो या बड़ा, हर वोट मायने रखता है। बागापुर गांव की यह कहानी लोकतंत्र, पारिवारिक समर्थन और नागरिक कर्तव्य की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई है।







