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एपस्टीन मामले पर ट्रम्प से सवाल पूछे जाएं: हिलेरी क्लिंटन

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

वाशिंगटन। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री Hillary Clinton ने सांसदों से अपील करते हुए कहा है कि उन्हें यौन अपराधी Jeffrey Epstein के साथ संबंधों को लेकर राष्ट्रपति Donald Trump से सवाल करने चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे संविधान की शपथ के अनुरूप इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करें।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, क्लिंटन इस मामले में अमेरिकी कांग्रेस की एक समिति के समक्ष पेश हुईं और कई घंटों तक गवाही दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें एपस्टीन के अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी। गवाही के बाद उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आए और सभी संबंधित लोगों से जरूरी सवाल किए जाएं।

क्लिंटन ने सांसदों से आग्रह किया कि ट्रम्प से उनके एपस्टीन के साथ संबंधों को लेकर पूछताछ की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि तथ्यों को सामने लाना होना चाहिए। इस दौरान उन्होंने समिति के अध्यक्ष James Comer की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जांच प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से सवाल उठाए।

उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि उनकी गवाही सार्वजनिक नहीं की गई। उनके अनुसार यदि बयान सार्वजनिक होता तो उन्हें मीडिया के सामने अलग से स्पष्टीकरण देने की जरूरत नहीं पड़ती। क्लिंटन ने समिति के कुछ रिपब्लिकन सदस्यों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने एपस्टीन या उसकी सहयोगी Ghislaine Maxwell से जुड़े अन्य पहलुओं पर पर्याप्त सवाल नहीं किए।

इस मामले में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Bill Clinton भी गवाही देने वाले हैं। शुरुआत में उन्होंने और हिलेरी क्लिंटन ने समिति के समन का विरोध किया था और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था, हालांकि बाद में संभावित संसदीय कार्रवाई की आशंका के चलते दोनों गवाही देने के लिए सहमत हो गए।

बिल क्लिंटन ने कहा कि उन्हें एपस्टीन के अपराधों की जानकारी नहीं थी और उन्होंने लगभग दो दशक पहले उससे संबंध समाप्त कर लिए थे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद चैरिटी कार्यों के दौरान उनका संपर्क हुआ था और बाद में उन्होंने उस संबंध पर अफसोस भी जताया। वहीं, ट्रम्प और क्लिंटन दोनों ही एपस्टीन से जुड़े किसी भी गलत आचरण से इनकार करते रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि एपस्टीन की वर्ष 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद से यह मामला अमेरिकी राजनीति और न्याय व्यवस्था में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।