बिजनेस डेस्क , रानी कुमारी
भारतीय मुद्रा बाजार के लिए आज का दिन 'ब्लैक मंडे' साबित हुआ। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के दबाव में भारतीय रुपया (INR) सोमवार को इतिहास में पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.08 के स्तर पर जा गिरा। यह रुपये के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड $115 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग अचानक बढ़ गई और रुपये पर दबाव आ गया। साथ ही, विदेशी निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने (लगभग $11 बिलियन) ने इस गिरावट को और तेज कर दिया।
बॉन्ड यील्ड 20 महीने के उच्च स्तर पर:
रुपये की गिरावट का सीधा असर बॉन्ड मार्केट पर भी दिखा। भारत की 10 वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड उछलकर 6.94% पर पहुंच गई। जानकारों का कहना है कि महंगाई बढ़ने की आशंका और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया है, जिससे बॉन्ड यील्ड में यह उछाल आया है।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हाल ही में RBI ने बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा पोजीशन लिमिट पर नए कड़े नियम लागू किए हैं ताकि सट्टेबाजी पर लगाम लगाई जा सके। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल रुपये में स्थिरता आना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।







