लोकल डेस्क, आकाश अस्थाना।
रक्सौल/नेपाल: नेपाल में फोटो पत्रकारिता की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन संवर्धन तथा आने वाली पीढ़ियों को देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दस्तावेजों से जोड़ने के उद्देश्य से "नेपाल फोटो संग्रहालय एवं पर्यटन संवर्धन केंद्र" के निर्माण संबंधी एक परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में फोटो पत्रकारों, मीडिया कर्मियों, पर्यटन विशेषज्ञों, सांस्कृतिक हस्तियों तथा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने नेपाल में फोटो पत्रकारिता के इतिहास को व्यवस्थित रूप से संरक्षित करने के लिए फोटो संग्रहालय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह पर्यटन विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नेपाल के विभिन्न कालखंडों की ऐतिहासिक तस्वीरों, प्राकृतिक धरोहरों, सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक परिवर्तन तथा राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं को एक ही स्थान पर संरक्षित कर अध्ययन, शोध और अवलोकन के लिए उपलब्ध कराने की अवधारणा कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही।
इस अवसर पर नेपाल फोटो पत्रकार महासंघ के अध्यक्ष हरिप्रसाद रेग्मी ने कहा कि फोटो संग्रहालय केवल तस्वीरों को सुरक्षित रखने का स्थान नहीं होगा, बल्कि यह नेपाल के इतिहास, संस्कृति, संघर्ष, उपलब्धियों और परिवर्तन के अमूल्य क्षणों का जीवंत अभिलेख बनेगा। उन्होंने कहा कि फोटो पत्रकारों द्वारा जीवनभर खींची गई ऐतिहासिक तस्वीरें राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं और उनका संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनके अनुसार, फोटो संग्रहालय के निर्माण से नई पीढ़ी का इतिहास से जुड़ाव मजबूत होगा, शोध कार्यों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को भी नई दिशा प्राप्त होगी। उन्होंने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सफल बनाने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र, पर्यटन व्यवसायियों और मीडिया जगत के बीच समन्वित सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने फोटो संग्रहालय एवं पर्यटन संवर्धन केंद्र को राष्ट्रीय गौरव की परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने के लिए संबंधित निकायों से आवश्यक पहल करने का आग्रह किया। उनका मानना था कि इस केंद्र के निर्माण से नेपाल की दुर्लभ ऐतिहासिक तस्वीरों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित होगा और देश की कला, संस्कृति, विरासत तथा पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में प्राप्त सुझावों और विचारों को संबंधित निकायों तक पहुँचाकर परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए आवश्यक समन्वय और पहल आगे बढ़ाई जाएगी।







