नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
तिरुवनंतपुरम। केरल सरकार ने राज्य में मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन तूफान- द नार्को हंट' को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी क्रम में राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला मंगलवार को चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय से मुलाकात करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दोनों राज्यों के बीच समन्वय और सहयोग को मजबूत करना है।
बैठक सुबह 11:30 बजे आयोजित होगी, जिसमें सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी, तस्करों के नेटवर्क की पहचान और उनके खिलाफ संयुक्त कार्रवाई जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके अलावा ड्रग्स की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने, तस्करी के नए तौर-तरीकों पर नजर रखने और दोनों राज्यों की कानून-व्यवस्था एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर भी विचार-विमर्श होगा।
इस दौरान केरल सरकार तमिलनाडु से 'ऑपरेशन तूफान- द नार्को हंट' अभियान में पूर्ण सहयोग का आग्रह करेगी। सरकार का मानना है कि मादक पदार्थों की तस्करी अंतरराज्यीय स्तर पर संचालित होने वाला संगठित अपराध है, जिससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पड़ोसी राज्यों के बीच साझा रणनीति और लगातार समन्वित कार्रवाई बेहद जरूरी है।
केरल सरकार लंबे समय से राज्य में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए व्यापक अभियान चला रही है। इसी रणनीति के तहत अब दक्षिण भारत के राज्यों के साथ मिलकर एक मजबूत तंत्र तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि तस्करी के नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर ही ध्वस्त किया जा सके और नशीले पदार्थों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
इससे पहले पिछले सप्ताह रमेश चेन्निथला ने बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से भी मुलाकात की थी। उस बैठक में दोनों राज्यों के बीच मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त अभियान चलाने और सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।
क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से केरल सरकार ने हाल ही में दक्षिणी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) की बैठक भी आयोजित की थी। इस बैठक में ड्रग माफिया के खिलाफ समन्वित अभियान चलाने, अंतरराज्यीय खुफिया जानकारी साझा करने, तस्करी के नए नेटवर्क की पहचान करने तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि पूरे दक्षिण भारत में नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।







