नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। वहीं पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में राहत दी गई है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार संशोधित दरें 16 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। सरकार का यह फैसला वैश्विक बाजार में बढ़ती तेल कीमतों और ऊर्जा क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर टैक्स 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। दूसरी ओर पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क को 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। नए संशोधन के साथ सरकार ने विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों पर अलग-अलग कर दरें लागू की हैं।
सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, तेल कंपनियों के मुनाफे और वैश्विक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है। इसी प्रक्रिया के तहत इस बार भी कर दरों में बदलाव किया गया है। जुलाई के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जबकि अप्रैल, मई और जून में लगातार गिरावट देखने को मिली थी। कीमतों में बदलाव के साथ सरकार ने कर ढांचे को भी उसी अनुरूप संशोधित किया है।
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जुलाई में इसकी कीमत करीब 17 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है, जबकि हालिया कारोबार में यह लगभग दो प्रतिशत की बढ़त के साथ 84.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े जोखिम ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, इसलिए वहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है।
गौरतलब है कि एक जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत में करीब पांच रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि अब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आने के बाद केंद्र सरकार ने विंडफॉल टैक्स में संशोधन करते हुए डीजल और एटीएफ के निर्यात पर कर बढ़ाने तथा पेट्रोल पर शुल्क कम करने का फैसला लिया है। सरकार आगे भी अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर कर दरों की समय-समय पर समीक्षा करती रहेगी।







