नेशनल डेस्क , रानी कुमारी।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं प्रसारण में देश के किसानों द्वारा अपनाई जा रही नई फसलों और खेती के आधुनिक तरीकों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कभी भारत में बहुत कम जाना जाने वाला एवोकाडो फल आज स्वास्थ्य और प्रीमियम बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
कम मांग वाले फल से प्रीमियम बाजार तक पहुंचा एवोकाडो
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ समय पहले तक एवोकाडो के बारे में देश में बहुत कम लोग जानते थे और इसकी मांग भी सीमित थी लेकिन अब ये लोगों की डाइनिंग टेबल तक पहुंच चुका है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण एवोकाडो को हेल्थ और प्रीमियम फूड मार्केट में भी पसंद किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिल रहा है, जिन्होंने पारंपरिक फसलों के साथ एवोकाडो की खेती को भी अपनाया है।
आंध्र प्रदेश के किसान वरदराज का दिया उदाहरण
पीएम ने आंध्र प्रदेश के कडप्पा के किसान वरदराज का उदाहरण देते हुए बताया कि वह कई वर्षों से अपने खेत में टमाटर और केले की खेती कर रहे थे। एक दिन उन्होंने अपने एक दोस्त के खेत में एवोकाडो की फसल देखी। इसके बाद उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से इस फसल की खेती के बारे में जानकारी हासिल की और इसे अपने खेत में शुरू किया और् वे अब तक चार टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं और स्थानीय दुकानों को सीधे इसकी आपूर्ति कर रहे हैं।
तमिलनाडु और कर्नाटक में भी बढ़ रही मांग
प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन का भी जिक्र किया। उन्होंने करीब आधा हेक्टेयर जमीन पर एवोकाडो की खेती शुरू की। इसी तरह कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में भी कुछ किसान अपने कॉफी के बागानों के बीच एवोकाडो के पौधे लगा रहे हैं। इससे किसानों को कॉफी और अन्य फसलों के साथ अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है।
पीएम मोदी ने किसानों की बढ़ती आय के पीछे केवल नई फसल को ही वजह नहीं बताया, बल्कि वैज्ञानिक सलाह और सीधे बाजार से जुड़ाव को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका संदेश था कि किसान पारंपरिक खेती के साथ बाजार की मांग के अनुरूप नई फसलों और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आमदनी के नए रास्ते खोल सकते हैं। एवोकाडो की बढ़ती मांग इस बात का उदाहरण है कि बदलती खाद्य आदतों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से कृषि क्षेत्र में भी नए बाजार पैदा हो रहे हैं। शहरों में एवोकाडो आधारित व्यंजनों की बढ़ती लोकप्रियता का फायदा अब देश के किसानों को भी मिल रहा है।
एवोकाडो की खेती को लेकर सामने आए किसान उदाहरण बताते हैं कि बदलती बाजार मांग को पहचानकर खेती में बदलाव किया जाए तो छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी नए आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं।







