Ad Image
Ad Image
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा || दिल्ली को मिली फिर साफ हवा, AQI 220 पर पहुंचा || PM मोदी ने भारतरत्न अटल जी और मालवीय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया || युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती आज

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

कुकी विधायकों की प्रधानमंत्री से अपील: अलग यूटी की मांग तेज

स्टेट डेस्क, ऋषि राज |

मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष के बीच अब कुकी विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है। विधायकों का कहना है कि मणिपुर की वर्तमान परिस्थिति में कुकी और मैतेई समुदाय पड़ोसी के तौर पर तो रह सकते हैं, लेकिन एक ही छत के नीचे शांति और स्थिरता के साथ रहना संभव नहीं है। इसी वजह से उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की है कि कुकी आदिवासियों के लिए एक अलग केंद्रशासित प्रदेश  बनाया जाए।

कुकी विधायकों का कहना है कि बीते वर्ष मई 2023 से शुरू हुई हिंसा के बाद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। लगातार टकराव और आपसी अविश्वास ने दोनों समुदायों को पूरी तरह अलग कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब एक राज्य के अंतर्गत रहते हुए सामंजस्य और विकास की राह संभव नहीं है।

मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा की शुरुआत तब हुई जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग पर अदालत का आदेश आया। कुकी और नागा आदिवासी समूहों ने इसका विरोध किया। इसके बाद भड़की हिंसा ने राज्य को झकझोर दिया। हजारों लोग विस्थापित हुए, सैकड़ों लोगों की जान गई और दोनों समुदायों के बीच गहरी खाई बन गई।

विधायकों की दलील

कुकी विधायकों ने केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि मणिपुर की भौगोलिक और सामाजिक संरचना को देखते हुए एक स्थायी समाधान यही है कि अलग प्रशासनिक इकाई बनाई जाए। उन्होंने कहा, “हम शांति चाहते हैं, लेकिन शांति तभी संभव है जब हमें अपने समाज की पहचान और सुरक्षा की गारंटी मिले। इसके लिए अलग यूटी ही रास्ता है।”

केंद्र की भूमिका अहम

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुकी विधायकों की यह मांग आने वाले समय में मणिपुर की राजनीति पर गहरा असर डाल सकती है। केंद्र सरकार के सामने चुनौती है कि वह राज्य की एकता बनाए रखे और साथ ही समुदायों की चिंताओं का समाधान भी करे। प्रधानमंत्री से सीधी अपील से साफ है कि कुकी समुदाय अब किसी ठोस कदम की उम्मीद कर रहा है।
फिलहाल केंद्र ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों और वार्ता तंत्र की सक्रियता बढ़ाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कोई राजनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो राज्य में तनाव और लंबा खिंच सकता है।

इस बीच, कुकी विधायकों की मांग ने यह साफ कर दिया है कि मणिपुर का जातीय संघर्ष केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक समाधान की भी गहरी मांग कर रहा है।