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कुछ लम्हें जिंदगी जीने का तजुर्बा भी सिखाते हैं: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: मुमकिन नहीं,हर वक्त मेहरबां रहे जिंदगी,कुछ लम्हे जीने का तजुर्बा भी सिखाते हैं।उक्त विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट ( 322 ई ) के  जोनल चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। ह्रदय कैसे चल रहा है,यह तो डाक्टर बता देंगे परन्तु ह्रदय में क्या चल रहा है यह तो स्वयं को ही देखना पड़ेगा। थोड़ा सा छुप-छुप कर खुद के लिए भी जी लिया करें, कोई नहीं कहेगा थक गए हो तो थोड़ा आराम करें। सूखे हुए पत्तों की तरह मत बनें अपनी जिंदगी, नहीं तो दुनिया में ऐसे बहुत लोग हैं जो बटोर कर आग लगा देंगें। "दिखावा" एक ऐसा "जाल" है जिसमें फंस कर इंसान अपनी असल "पहचान" ओर "सुकून" दोनों खो देता है। "पुण्य" छप्पर फाड़ कर देता है, "पाप" थप्पड़ मार कर लेता है। कौवा कोयल की आवाज को दबा सकता है,मगर खुद की आवाज को मधुर नहीं बना सकता,उसी तरह निंदा करने वाला व्यक्ति सज्जन को बदनाम कर सकता है,मगर स्वयं सज्जन नहीं बन सकता। सबसे मुश्किल है किसी के मन को समझना,सबसे आसान है किसी के बारे में गलत राय बना लेना। हम चाहकर भी अपने प्रति लोगों की धारणा को नहीं बदल सकते इसलिए सुकुन से अपनी ज़िंदगी जिएं और खुश रहें। जिनके पास संतुष्टता का विशेष गुण है उनके पास सर्व गुण स्वतः आते जाएंगे। संसार की चीजों को पाने की चाह रखने वाला ईश्वर को नहीं पा सकते,परन्तु ईश्वर को पाने की चाह रखने वाला संसार की हर चीज को बड़ी सहजता से प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि किसी भी प्राप्ति का आधार मनोबल है और मनोबल को बढ़ाने की सर्वोत्तम विधि है ईश्वर का सानिध्य।जब मनुष्य जन्म लेता है तो उसके पास सांसे तो होती है पर कोई नाम नहीं होता और जब मनुष्य की मृत्यु होती है तो उसके पास नाम तो होता है पर सांसे नहीं होती, इसी सांसों और नाम के बीच की यात्रा को "जीवन" कहते हैं। न किसी के अभाव में जिएं, न किसी के प्रभाव में जिएं, यह जिंदगी है आपकी,अपने स्वभाव में जिएं।