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केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने को कैबिनेट की मंजूरी

नेशनल डेस्क, वेरॉनिका राय |

  • विधानसभा पहले ही पारित कर चुकी है प्रस्ताव, मलयालम भाषा के अनुरूप नाम परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम

तिरुवनंतपुरम | केंद्र सरकार की कैबिनेट ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे पहले केरल विधानसभा इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर चुकी थी। राज्य सरकार और स्थानीय लोगों का मानना है कि मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता है, इसलिए आधिकारिक दस्तावेजों और संविधान में भी यही नाम होना चाहिए। कैबिनेट की इस मंजूरी को राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्य सरकार लंबे समय से इस नाम परिवर्तन की मांग कर रही थी। सरकार का तर्क है कि ‘केरल’ अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में प्रचलित नाम है, जबकि ‘केरलम’ राज्य का मूल और पारंपरिक नाम है, जिसका उपयोग मलयालम भाषा में किया जाता है। इस बदलाव से राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सही पहचान मिलने की उम्मीद है।

केरल विधानसभा ने पहले ही सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। इसके बाद केंद्र की कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। अब इस बदलाव को लागू करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसमें संविधान और आधिकारिक दस्तावेजों में संशोधन शामिल हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस फैसले को महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे राज्य की जनता के बीच सांस्कृतिक गौरव और भाषाई पहचान को लेकर सकारात्मक संदेश जाएगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की पहचान और परंपरा का सम्मान है।

स्थानीय लोगों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ‘केरलम’ नाम राज्य की भाषा और संस्कृति के अधिक करीब है। इससे राज्य की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।

हालांकि, नाम परिवर्तन की अंतिम प्रक्रिया संवैधानिक संशोधन और आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही पूरी होगी। इसके बाद सभी सरकारी दस्तावेजों, मानचित्रों और आधिकारिक रिकॉर्ड में ‘केरल’ की जगह ‘केरलम’ नाम का उपयोग किया जाएगा इस फैसले को केरल की सांस्कृतिक अस्मिता को सशक्त करने और राज्य की भाषाई विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।