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केसरिया के लोहरगावा में घास काटने गए 6 मासूम काल के गाल में समाए

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

  • एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में बुझ गए तीन घरों के चिराग।

पूर्वी चंपारण: नियति का क्रूर खेल कहें या एक दर्दनाक हादसा, मंगलवार की शाम पूर्वी चंपारण के केसरिया थाना क्षेत्र के लोहरगावा (राखवा पंचायत) के लिए किसी प्रलय से कम नहीं थी। राघवा नदी के शांत जल ने देखते ही देखते छह मासूम जिंदगियों को अपनी आगोश में ले लिया। एक-दूसरे को बचाने की जद्दोजहद में छह बच्चे जल-समाधि ले गए, जिससे न केवल तीन परिवारों के आंगन सूने हो गए, बल्कि पूरे जिले की रूह कांप उठी है।

हृदयविदारक दास्तां: बचाने की कोशिश बनी काल का कारण

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के वक्त गांव के छह बच्चे—प्रतीक्षा, प्रिया, सोनाक्षी, सोनाली, छोटी और प्रिंस—रोज की तरह राघवा नदी के किनारे घास काटने और नहाने गए थे। खेलते-खेलते अचानक एक बच्ची का पैर गहरे पानी में फिसल गया। उसे डूबता देख और उसकी चीखें सुन, किनारे खड़े बाकी बच्चे उसे बचाने के लिए एक-एक कर पानी में कूद पड़े।
मासूमों को अंदाजा नहीं था कि नदी की गहराई उनके साहस पर भारी पड़ जाएगी। 'बचाओ-बचाओ' की चीखें हवा में गूंजीं, जिसे सुनकर ग्रामीण मौके की ओर दौड़े, लेकिन जब तक मदद पहुंचती, नदी की लहरों ने अपना खौफनाक खेल पूरा कर लिया था।

तीन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

इस त्रासदी ने तीन पड़ोसी परिवारों को उम्र भर का कभी न मिटने वाला जख्म दे दिया है।

  • एक ही आंगन से उठीं तीन अर्थियां: प्रतीक्षा कुमारी, प्रिया कुमारी और सोनाक्षी कुमारी, जो एक ही परिवार की थीं, अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
  • दो सहेलियों का साथ छूटा: दूसरे परिवार की सोनाली और छोटी कुमारी भी पानी की लहरों से जंग हार गईं।
  • बुझ गया घर का इकलौता चिराग: तीसरे परिवार का 12 से 15 वर्षीय प्रिंस कुमार भी इस हादसे का शिकार हो गया।

ये बच्चे अक्सर साथ खेला करते थे, और आज नियति ने उन्हें मौत की आगोश में भी साथ ही सुला दिया। जब गांव की गलियों से एक साथ छह अर्थियां निकलीं, तो पत्थर दिल इंसान की आंखें भी छलक पड़ीं।

हमने अपने जीवन में ऐसा मंजर कभी नहीं देखा। बच्चों की किलकारियों से गूंजने वाला मोहल्ला आज मातम की चीत्कारों से गूंज रहा है। ऐसा लगता है जैसे पूरे गांव की सांसें थम गई हों — एक भावुक ग्रामीण

प्रशासनिक तत्परता और मुआवजे का ऐलान

हादसे की खबर मिलते ही केसरिया थाना पुलिस और स्थानीय गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची। घंटों की मशक्कत के बाद सभी शवों को बाहर निकाला गया। जिलाधिकारी सौरभ अग्रवाल ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग के तहत पीड़ित परिवारों को तत्काल उचित मुआवजा देने की घोषणा की है। फिलहाल, पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोतिहारी भेज दिया है।

गांव में पसरा सन्नाटा, नहीं जला किसी के घर चूल्हा

लोहरगावा गांव में आज सन्नाटा पसरा है। किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। माताओं का रो-रोकर बुरा हाल है और पिता की पथराई आंखें अपने कलेजे के टुकड़ों को तलाश रही हैं। राघवा नदी का वह तट, जहां कल तक हंसी-ठिठोली हुआ करती थी, आज एक डरावने खामोश कब्रिस्तान जैसा प्रतीत हो रहा है।