Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

कोलकाता: इस्तीफा देने से इनकार पर ममता बनर्जी का बड़ा बयान

नेशनल डेस्क, मुस्कान सिंह ।

राज्य में संवैधानिक स्थिति को लेकर बढ़ी चर्चा, विशेषज्ञों ने दिए अलग-अलग मत

पश्चिम बंगाल। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता और वे राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी।

ममता बनर्जी ने कहा कि नैतिक रूप से उनकी जीत हुई है और वे आगे की रणनीति पर पार्टी नेताओं के साथ चर्चा करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से था, जिसने उनके अनुसार विपक्ष के पक्ष में काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि वे अब सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगी।
इस बयान के बाद राज्य में संवैधानिक स्थिति को लेकर बहस शुरू हो गई है। वरिष्ठ वकील शेखर नाफड़े का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार करती हैं, तो संविधान के तहत राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं, क्योंकि चुनाव परिणामों के बाद जनादेश का पालन जरूरी होता है।

जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में राज्यपाल आर एन रवि के पास यह अधिकार है कि वे विधानसभा को भंग कर नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं। संवैधानिक विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं भी देती हैं, तब भी नई विधानसभा के गठन और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यपाल नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं और नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति कर सकते हैं।
वहीं, विपक्ष ने ममता बनर्जी के इस रुख की कड़ी आलोचना की है। 

बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने ममता बनर्जी के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आज़ाद भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने चुनाव हारने के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से चिपके रहकर ममता बनर्जी न केवल अराजकतावादी रवैया अपना रही हैं, बल्कि मतदाताओं की भावनाओं और जनादेश की पवित्रता का भी खुलेआम अनादर कर रही हैं।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है और अब सबकी नजरें आगे होने वाले संवैधानिक कदमों पर टिकी हुई हैं।