Ad Image
Ad Image
ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी || अहमदाबाद - मुंबई हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, 12 की मौत 25 से ज्यादा घायल || राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: समझौते के लिए ईरान बेताब, ईरान का इनकार || Delhi - NCR में सीएनजी फिर महंगा, तीन दिन में तीसरी बार कीमत वृद्धि || PM मोदी का नीदरलैंड दौरा, द्विपक्षीय रिश्ते की बेहतरी पर बल दिया || लन्दन: ब्रिटिश PM कीर स्टारमर दे सकते है इस्तीफा, स्थानीय चुनावों में पार्टी की हार का असर || युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

गतिशीलता व ऊर्जा ही जीवन यात्रा का प्रवाह: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: जीवन एक प्रवाह की भांति है।इसमें गतिशीलता है,ऊर्जा है, त्वरा है - आवश्यकता मात्र इसे दिशा देने की पड़ती है।दिशा मिल जाए तो इसी प्रवाह को नदी,प्रपात बनते देर नहीं लगती अन्यथा बिना दिशा के मनुष्य,अपने ही क्षेत्र में उलझा-सा बैठा रहता है।

उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। वही जीवन,जिसमें एक प्रवाह के रूप में अनेकों का कल्याण करने की संभावना थी, वही जीवन एक रुका-ठहरा-नाला बनकर रह जाता है। बदबू-बीमारियाँ उसकी भवितव्यता बन जाती हैं।हर इंसानी जीवन में ईश्वर के अलावा कोई न कोई सदगुरू होते हैं जो मनुष्य के जीवन की ऊर्जा के प्रवाह को दिशा देने का कार्य करते हैं।

चंचल चित्त को,भटके मन को एवं बिखरी हुई ऊर्जा को समेट-सहेजकर वे एक ऐसी दिशा प्रदान करते हैं कि मनुष्य स्वयं का नहीं,अनेकों का कल्याण करता दृश्यमान होता है।आने वाला समय प्रतिभाओं को ढूंढने की,तलाशने की,तराशने की है।प्रतिभा का अर्थ संपदा नहीं होता।संपदा व्यक्ति को पड़ी हुई मिल जाती, डाका डालने पर,लॉटरी खुलने पर मिल जाती है, परन्तु प्रतिभा मनुष्य की स्वअर्जित योग्यता है। व्यक्तित्व उसी आधार पर निर्मित होते हैं।

युग-परिवर्तन का कार्य बड़ा व विशाल है।इसको परिपूर्ण करने के लिए विविध प्रतिभाओं की जरूरत होगी।हमें हर क्षेत्र से प्रतिभाओं यथा विद्वानों की जो लोगों को तर्क प्रमाणों से सोचने की नई पद्धति प्रदान करे,कलाकारों की,रचनाकारों की जो लोगों की भावनाओं को स्पर्श कर सके साथ ही धनवानों की आवश्यकता है जो अपना धन विलास में खर्च न करके लोकहित में लगा सकें। राजनीतिज्ञों की आवश्यकता है,जो जनहित की योजनाएँ बनाकर उनका क्रियान्वयन कर सकें।समय आने पर ये प्रतिभावान ऐसे उठ खड़े होंगे,जैसे बरसात आने पर फसल लहलहाने लगती है।