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गाज़ा में भुखमरी को लेकर ट्रंप ने जताई चिंता, नेतन्याहू के बयान का किया खंडन

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा में जारी मानवीय संकट को लेकर एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि वहां "वास्तविक भुखमरी" हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका गाज़ा में "फूड सेंटर्स" स्थापित करेगा ताकि भूख से तड़प रहे लोगों को राहत मिल सके। हालांकि ट्रंप ने इस योजना को लेकर कोई ठोस जानकारी या टाइमलाइन नहीं दी।

ट्रंप ने कहा कि "इसराइल को मानवीय सहायता रोकने की जिम्मेदारी लेनी होगी," और साथ ही उन्होंने हमास से बंधकों की रिहाई की अपील करते हुए कहा कि यह शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।

गाज़ा में भूख से मौतों का सिलसिला जारी

गाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 14 और लोगों की मौत भूख और कुपोषण के कारण हो चुकी है। इस संकट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता प्रमुख ने चेतावनी दी है कि "आने वाले दिन गाज़ा के लिए निर्णायक होंगे।" उन्होंने गाज़ा में सहायता पहुंचाने में हो रही देरी और बाधाओं को तत्काल हटाने की मांग की।

इसराइली मानवाधिकार संगठनों का गंभीर आरोप

इसराइल के दो प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने अपनी रिपोर्ट में इसराइली सरकार पर गाज़ा में नरसंहार का आरोप लगाया है। इन संगठनों ने कहा कि जानबूझकर मानवीय राहत को रोका जा रहा है जिससे निर्दोष लोगों की मौत हो रही है। हालांकि इसराइल सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि "हमारे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन हम इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं।"

अमेरिकी सीनेटर ने भी जताई नाराजगी

मेन से निर्दलीय सीनेटर एंगस किंग ने कहा है कि "जब तक गाज़ा में बच्चे भूख से मर रहे हैं, तब तक वह इसराइल को और अधिक सहायता देने के पक्ष में वोट नहीं करेंगे।" उन्होंने ट्रंप के बयान की सराहना की, लेकिन साथ ही कहा कि "मुख्य जिम्मेदारी इसराइल की है और उसे एक विशाल मानवीय सहायता कार्यक्रम का समर्थन करना चाहिए।"

सीनेटर किंग ने कहा, "इसराइल ने अब तक सहायता पहुंचाने में अड़चनें पैदा की हैं। यह समय है कि वो अपनी नीति बदले और मानवीय आधार पर राहत प्रदान करे।"

गाज़ा में भूख और मानवीय संकट को लेकर वैश्विक चिंता लगातार बढ़ रही है। ट्रंप और अमेरिकी सीनेटरों के हालिया बयानों से साफ है कि अब इसराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है कि वह मानवीय सहायता के रास्ते खोले और हालात को सामान्य बनाने में सहयोग करे।