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गाजा में बढ़ता मानवीय संकट, मृतकों का आंकड़ा 72,938 पहुंचा

विदेश डेस्क, ऋषि राज

गाजा। गाजा पट्टी में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई के बीच मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक मृतकों की संख्या बढ़कर 72,938 हो गई है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं। लगातार हो रहे हमलों के कारण गाजा के कई इलाके गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में नागरिक विस्थापन का सामना कर रहे हैं।

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले 48 घंटों के दौरान सात लोगों की मौत हुई है तथा 25 अन्य घायल हुए हैं। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां सीमित संसाधनों के बीच उनका उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव के कारण चिकित्सकीय व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में पहुंच गई है।

अधिकारियों ने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे दबे या लापता हुए हैं। राहत एवं बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं। कई इलाकों में बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं, जिससे आम नागरिकों का जीवन और कठिन हो गया है।

संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने गाजा की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि लगातार जारी संघर्ष का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। खाद्य सामग्री, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी के कारण मानवीय संकट और गहरा गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष जल्द समाप्त नहीं हुआ तो क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्धविराम और मानवीय सहायता पहुंचाने की अपील कर रहा है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने का आग्रह किया है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार गाजा संकट केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा है और कई देशों की विदेश नीति पर इसका असर देखा जा रहा है।

दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में संघर्ष की दिशा क्या होगी और क्या शांति स्थापित करने के लिए कोई प्रभावी पहल सामने आती है। फिलहाल गाजा के लाखों नागरिक भय, असुरक्षा और अनिश्चितता के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं।