हेल्थ डेस्क, प्रीति पायल।
गुजरात। गुजरात में चांदीपुरा वायरस के प्रकोप ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी। इस संक्रमण के कारण 10 लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य मरीजों में भी वायरस की पुष्टि हुई। यह वायरस मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है और तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी और लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
चांदीपुरा वायरस (CHPV) एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक वायरस है, जिसकी पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। यह वायरस मुख्य रूप से सैंड फ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दौरे और मस्तिष्क में सूजन शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
गुजरात सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान शुरू किए। सैंड फ्लाई को नियंत्रित करने के लिए दवा का छिड़काव किया गया, संदिग्ध मरीजों की जांच की गई और लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने तथा बच्चों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी गई। साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए आसपास की सफाई रखना, मच्छरदानी का उपयोग करना, बच्चों को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाना और तेज बुखार या दौरे जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल ले जाना आवश्यक है। समय पर पहचान और उपचार से इस बीमारी के गंभीर प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।







