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घबराकर गैस सिलेंडर बुक न करें, ढाई दिन में होगी डिलिवरी: सरकार

नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार

नई दिल्ली, पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं से रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग को लेकर घबराहट न दिखाने की अपील की है। सरकार ने कहा है कि बुकिंग के बाद ढाई दिन के भीतर सिलेंडर की डिलिवरी सुनिश्चित की जाएगी।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बुधवार को अंतर-मंत्रालय संवाददाता सम्मेलन में बताया कि घरेलू एलपीजी के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। इन उपायों के चलते हाल के दिनों में एलपीजी उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि रसोई गैस का अन्य कार्यों में उपयोग रोकने के लिए सिलेंडर डिलिवरी प्रमाणन कोड प्रणाली को सख्ती से लागू किया जा रहा है। फिलहाल लगभग 90 प्रतिशत उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है।

शर्मा ने बताया कि भारत एलपीजी की जरूरत का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है और आयातित गैस का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ईरान के पास स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से आता है, जो मौजूदा युद्ध की स्थिति से प्रभावित है। इसी वजह से सरकार ने विशेष आदेश जारी कर सरकारी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम स्तर तक बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि हाल ही में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को एक सिलेंडर के लिए 613 रुपये चुकाने पड़ते हैं। इस बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर प्रतिदिन लगभग 80 पैसे का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि के बावजूद हस्तक्षेप के जरिए देश में कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिदिन लगभग 18.9 करोड़ मानक घन मीटर गैस की खपत होती है, जिसमें से 9.7 करोड़ घन मीटर गैस आयात की जाती है। खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण फिलहाल करीब 4.7 करोड़ घन मीटर गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसकी भरपाई के लिए वैकल्पिक स्रोतों से गैस लाने की कोशिश की जा रही है।

सरकार ने बताया कि दो एलएनजी टैंकर फिलहाल भारत की ओर आ रहे हैं। उपलब्ध गैस को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए नियंत्रण आदेश भी जारी किया गया है। इसके तहत घरेलू उपयोग, परिवहन, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है। उर्वरक क्षेत्र को 70 प्रतिशत गैस आपूर्ति की जा रही है, जबकि तेल शोधन संयंत्रों को अपने उपभोग में 35 प्रतिशत तक कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं।