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चीन के घटकों से हूती बना रहे लंबी दूरी की मिसाइलें

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

नई दिल्ली। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही ऐसी उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास में जुटे हैं, जिनकी मारक क्षमता सऊदी अरब और इजरायल तक बताई जा रही है। इन मिसाइलों के निर्माण में चीन से भेजे गए कुछ घटकों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, हथियारों से जुड़े इन चीनी घटकों की मदद से हूती अपनी मिसाइल क्षमता को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है, जब पिछले कुछ हफ्तों में सऊदी अरब पर हूती हमले तेज हुए हैं और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च की जांच में सामने आया है कि हूती विद्रोहियों द्वारा विकसित की जा रही ये मिसाइलें ईरान की खेबर शेकन मिसाइल से प्रेरित या उसी डिजाइन पर आधारित प्रतीत होती हैं। खेबर शेकन एक सटीक निर्देशित बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी खासियत यह है कि वह एयर डिफेंस सिस्टम से बचने के लिए उड़ान के दौरान अपनी दिशा में बदलाव कर सकती है। इसी डिजाइन पर आधारित मिसाइलों की संभावित मारक क्षमता करीब 1,200 मील तक बताई गई है। इतनी दूरी तक पहुंचने की क्षमता होने पर सऊदी अरब का पूरा क्षेत्र और इजरायल भी इनके संभावित निशाने की सीमा में आ सकते हैं।

हूती की मिसाइल क्षमता में यह संभावित बढ़ोतरी ऐसे समय में सामने आई है, जब सऊदी अरब के खिलाफ उनके हमले लगातार बढ़ रहे हैं। सऊदी नेतृत्व वाली नाकाबंदी को लेकर यमन में तनाव पहले से ही बना हुआ है और हाल के हफ्तों में स्थिति और गंभीर हुई है। दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान से जुड़े हमलों और तनाव ने भी क्षेत्रीय हालात को प्रभावित किया है। इन घटनाक्रमों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हूती विद्रोहियों की गतिविधियों की आलोचना करते हुए उनके व्यवहार को बेहद खराब बताया है।

जांच के लिए यमन के अधिकारियों द्वारा जुलाई में जब्त की गई दो खेपों को आधार बनाया गया। इन खेपों में मिसाइल से जुड़े उपकरणों को अन्य सामान के बीच छिपाकर भेजे जाने की जानकारी मिली। जब्त सामग्री में मिसाइल मोटर और एयरफ्रेम के लिए तैयार किए गए विशेष धातु के घटक, उड़ान के दौरान मिसाइल को स्थिर रखने वाले फिन्स तथा खेबर शेकन श्रृंखला में इस्तेमाल होने वाले ठोस प्रणोदक रॉकेट मोटर से जुड़े हिस्से शामिल थे। इन सामग्रियों से संकेत मिलता है कि हूती विद्रोही अपनी मिसाइलों के निर्माण और तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए बाहरी स्रोतों से मिलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

शिपिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच में एक चीनी कंपनी का भी उल्लेख मिला है। यह कंपनी सटीक धातु निर्माण के क्षेत्र में काम करती है और एयरोस्पेस से जुड़े घटकों के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है। जांच में सामने आए कुछ उपकरण ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल नागरिक क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। हालांकि, कई अन्य घटक ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें विशेष रूप से मिसाइलों के निर्माण या उनके तकनीकी ढांचे के लिए तैयार किया गया है। इस वजह से इन सामानों की आपूर्ति और उनके संभावित सैन्य इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटकों की बरामदगी और उनकी जांच से हूती विद्रोहियों की मिसाइल क्षमता को लेकर नई जानकारी सामने आई है। यदि खेबर शेकन जैसे डिजाइन पर आधारित मिसाइलें हूती के पास विकसित हो रही हैं और उनकी संभावित पहुंच 1,200 मील तक है, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। ऐसी क्षमता से सऊदी अरब के अलावा इजरायल भी संभावित खतरे के दायरे में आ सकता है। वहीं, चीन से आए कुछ विशेष घटकों के इस्तेमाल की जानकारी इस पूरे मामले को और संवेदनशील बनाती है। क्षेत्र में पहले से जारी संघर्ष और बढ़ते हमलों के बीच हूती विद्रोहियों की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता का विस्तार सऊदी अरब और इजरायल के लिए सुरक्षा चुनौती को बढ़ाने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है।