विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वाशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियारों की क्षमता हासिल करे और इस मुद्दे पर उसका रुख अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप हो सकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के दृष्टिकोण से चीन भी ऐसे किसी विकास के पक्ष में नहीं होगा, जिससे परमाणु तनाव बढ़े।
ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि चीन के पास ईरान पर प्रभाव डालने की क्षमता है और वह चाहे तो ईरान को अमेरिका के साथ किसी संभावित समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है। उनका मानना है कि चीन की भूमिका इस विषय में महत्वपूर्ण हो सकती है और कूटनीतिक स्तर पर उसका हस्तक्षेप असरदार साबित हो सकता है।
उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है और प्रमुख शक्तियां इस विषय पर अपने-अपने स्तर पर रणनीतिक दृष्टिकोण रखती हैं। ऐसे में चीन जैसे प्रभावशाली देश की भागीदारी भविष्य की वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि विभिन्न पक्ष आपसी संवाद और समझदारी के साथ आगे बढ़ें, तो क्षेत्र में तनाव कम करने और समझौते की संभावनाओं को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से इस बात पर जोर दिया कि कूटनीतिक समाधान ही लंबे समय तक स्थिरता सुनिश्चित करने का बेहतर माध्यम हो सकता है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति इन दिनों चीन की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को नया आयाम देने वाली मानी जा रही है, जिसमें रणनीतिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा प्रमुख रूप से शामिल है।
यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच वार्ता हुई है, जबकि आगे के कार्यक्रमों में औपचारिक बैठकों और कार्य स्तर पर संवाद जारी रहने की संभावना जताई गई है। माना जा रहा है कि वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय तनाव जैसे मुद्दे इन चर्चाओं के केंद्र में रह सकते हैं।







