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छात्रों पर हमला या पुलिस की जवाबदेही से बचने का आरोप? राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस पर उठाए सवाल

नेशनल डेस्क :- शुभम कुमार तिवारी 

जिस पुलिस पर कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी है, उसी पुलिस पर जब छात्रों के साथ मारपीट करने और शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगें, तो सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और लोकतंत्र में नागरिकों के अधिकारों का भी बन जाता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस पर कुछ ऐसे ही गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और पुलिस की कथित बर्बरता को बिना जवाबदेही के नहीं छोड़ा जा सकता।


 *क्या है पूरा मामला?*

दिल्ली में छात्रों के साथ कथित मारपीट का मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है कि उसने केरल की अथिरा और राजस्थान की रितु समेत कई युवाओं के साथ मारपीट की और इस मामले में प्राथमिकी यानी FIR दर्ज करने में भी कार्रवाई नहीं की।

16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित यूएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले को उठाते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि अगर छात्रों के साथ मारपीट हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन अधिकारियों की गलती सामने आती है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस मामले में राहुल गांधी ने केवल दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि केरल और राजस्थान में भी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने इस मुद्दे को युवाओं के अधिकारों, विरोध करने की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़कर पेश किया।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों और किसी स्वतंत्र जांच में साबित हुए तथ्यों के बीच अंतर है। उपलब्ध रिपोर्ट में घटना से जुड़े सभी पक्षों का विस्तृत बयान नहीं दिया गया है। इसलिए मारपीट की पूरी परिस्थितियों और पुलिस की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए अतिरिक्त जानकारी और जांच के नतीजे जरूरी होंगे।

*राहुल गांधी ने क्या कहा?*

राहुल गांधी ने कहा कि केरल की अथिरा और राजस्थान की रितु सहित कई युवाओं के साथ दिल्ली पुलिस ने मारपीट की है। उन्होंने बताया कि इस मामले में उन्होंने केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से भी बात की है।

राहुल गांधी के अनुसार, केरल में इस मामले में जीरो FIR दर्ज हो चुकी है। जीरो FIR का मतलब है कि किसी संज्ञेय अपराध की शिकायत किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, भले ही अपराध उस थाने के अधिकार क्षेत्र में न हुआ हो। इसके बाद मामले को संबंधित पुलिस थाने में भेजा जा सकता है।

यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिकायत करने वाले व्यक्ति को केवल इस वजह से परेशान नहीं होना चाहिए कि घटना किसी दूसरे इलाके में हुई है।

राहुल गांधी ने मांग की कि जिन पुलिस अधिकारियों की भूमिका इस मामले में गलत पाई जाती है, उनके खिलाफ केरल, राजस्थान और संबंधित अदालतों में कानूनी कार्रवाई की जाए।

उनके बयान का मुख्य संदेश यह है कि वर्दी पहनने वाले किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। अगर किसी अधिकारी ने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है, तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोष साबित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

*जीरो FIR क्या होती है और इस मामले में इसका क्या महत्व है?*

इस खबर का एक महत्वपूर्ण पहलू जीरो FIR है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि शिकायत उसी पुलिस थाने में दर्ज करानी पड़ती है, जिसके क्षेत्र में घटना हुई हो। लेकिन जीरो FIR की व्यवस्था इस समस्या को दूर करने के लिए बनाई गई है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति के साथ दिल्ली में कथित मारपीट होती है और वह केरल में शिकायत दर्ज कराने पहुंचता है, तो केवल क्षेत्राधिकार का हवाला देकर उसे शिकायत दर्ज कराने से नहीं रोका जाना चाहिए। पुलिस शिकायत दर्ज करके उसे संबंधित थाने तक पहुंचा सकती है।

इसका उद्देश्य पीड़ित को तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराना और पुलिस व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाना है।

हालांकि, जीरो FIR दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि आरोप अपने आप साबित हो गए हैं या किसी व्यक्ति को दोषी घोषित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि शिकायत को औपचारिक रूप से दर्ज करके कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

इस मामले में राहुल गांधी का कहना है कि केरल में जीरो FIR दर्ज हो चुकी है। अब यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में किन घटनाओं का उल्लेख किया गया है, संबंधित अधिकारियों से क्या पूछताछ हुई है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

 *दिल्ली पुलिस की जवाबदेही पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?*

राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस की कथित बर्बरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे बिना जवाबदेही के नहीं जाने दिया जाएगा। उनके बयान के केंद्र में एक बुनियादी सवाल है—अगर पुलिस पर ही मारपीट का आरोप लगे, तो शिकायत करने वाले व्यक्ति को न्याय कैसे मिलेगा?

पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना, नागरिकों की सुरक्षा करना और अपराध की शिकायतों पर कानूनी कार्रवाई करना है। किसी भी विरोध-प्रदर्शन या सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार होता है। लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल भी निर्धारित नियमों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के दायरे में होना चाहिए।

अगर किसी कार्रवाई के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया हो, किसी व्यक्ति के साथ गैरकानूनी व्यवहार हुआ हो या शिकायत दर्ज करने में अनुचित देरी की गई हो, तो इन सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

दूसरी तरफ, किसी भी घटना की पूरी तस्वीर समझने के लिए पुलिस का पक्ष, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों को भी देखना चाहिए। केवल राजनीतिक आरोप के आधार पर किसी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी तरह, वर्दी में होने के कारण किसी अधिकारी को आरोपों की जांच से बाहर भी नहीं रखा जा सकता।

इसलिए इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि जांच निष्पक्ष हो, शिकायतकर्ता की बात सुनी जाए और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाए।

*1930 के धरसाना सत्याग्रह का उदाहरण क्यों दिया राहुल गांधी ने?*

राहुल गांधी ने अपने बयान में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने 1930 के धरसाना सत्याग्रह का जिक्र करते हुए कहा कि सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में निहत्थे सत्याग्रहियों ने पुलिस की लाठियां सहीं, लेकिन किसी ने हाथ नहीं उठाया।

धरासना सत्याग्रह नमक कानून के खिलाफ चलाए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। महात्मा गांधी की गिरफ्तारी के बाद सरोजिनी नायडू और अन्य नेताओं ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। सत्याग्रहियों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसक तरीके से विरोध किया।

राहुल गांधी ने इस ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस हड्डियां तोड़ सकती है, लेकिन सत्याग्रह को नहीं तोड़ सकती।

इस उदाहरण के जरिए वह मौजूदा मामले को अहिंसक विरोध, नागरिक साहस और लोकतांत्रिक अधिकारों के संदर्भ में देख रहे हैं। उनका संदेश है कि विरोध करने वाले युवाओं के साथ किसी भी तरह की कथित हिंसा को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

हालांकि, 1930 के ब्रिटिश शासन और आज के लोकतांत्रिक भारत की परिस्थितियां अलग हैं। इस ऐतिहासिक उदाहरण का इस्तेमाल राहुल गांधी ने मुख्य रूप से अहिंसा और विरोध के अधिकार के महत्व को समझाने के लिए किया है।

 *युवाओं और लोकतंत्र के अधिकारों से कैसे जुड़ा है मामला?*

भारत में नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्वक बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, इन अधिकारों पर संविधान के अनुसार उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।

इसका मतलब है कि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हैं, अपनी बात रख सकते हैं और सरकार या प्रशासन से सवाल पूछ सकते हैं। वहीं, पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी होती है।

लेकिन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अगर प्रदर्शन के दौरान कानून का उल्लंघन होता है, तो पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है। दूसरी ओर, अगर पुलिस पर अनुचित बल प्रयोग या अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगता है, तो उस पर भी कानून के अनुसार सवाल उठाए जा सकते हैं।

यही वजह है कि छात्रों से जुड़ी ऐसी घटनाएं केवल पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच का मामला नहीं रहतीं। वे नागरिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के समान इस्तेमाल जैसे बड़े सवालों को सामने लाती हैं।

राहुल गांधी ने भी युवाओं, खासकर युवतियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के युवा निडर, दृढ़ और एकजुट हैं तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े हैं। उन्होंने युवाओं के साथ खड़े रहने की बात कही।

 *अब किन सवालों के जवाब मिलने जरूरी हैं?*

इस पूरे मामले में कुछ अहम सवाल हैं, जिनके जवाब सामने आने से घटना की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।

* घटना कैसे हुई? छात्रों और पुलिस के बीच विवाद किस वजह से शुरू हुआ और उस समय वहां क्या परिस्थितियां थीं?

* मारपीट के आरोपों के साक्ष्य क्या हैं? क्या घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान या मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध हैं?

* शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? राहुल गांधी ने FIR दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में संबंधित पुलिस अधिकारियों का क्या पक्ष है?

* जीरो FIR की स्थिति क्या है? केरल में दर्ज जीरो FIR किस पुलिस थाने को भेजी गई है और जांच कहां तक पहुंची है?

* जिम्मेदारी किसकी तय होगी? अगर जांच में किसी अधिकारी की गलती सामने आती है, तो उसके खिलाफ कौन-सी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी?

इन सवालों के जवाब मिलने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है, शिकायत पर पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी।

फिलहाल, इस खबर का मुख्य मुद्दा राहुल गांधी द्वारा दिल्ली पुलिस पर लगाए गए आरोप, छात्रों के साथ कथित मारपीट की जांच की मांग और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का सवाल है। उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर आरोपों को स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा; मामले की वास्तविक स्थिति समझने के लिए पुलिस का आधिकारिक पक्ष और जांच से जुड़ी पुष्ट जानकारी भी आवश्यक है।