नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए कहा कि बड़े सरकारी अभियानों के साथ-साथ छोटे, निरंतर और व्यक्तिगत प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आए ऐसे उदाहरणों का उल्लेख किया, जो यह साबित करते हैं कि आम नागरिकों की पहल से पर्यावरण में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले के निवासी बेनॉय दास का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने बीते कई वर्षों से अपने जिले को हरा-भरा बनाने का संकल्प अकेले दम पर उठाया। श्री दास ने हजारों पेड़ लगाए, जिनमें से अनेक पौधों को खरीदने, लगाने और उनकी देखभाल का खर्च स्वयं वहन किया। जहां आवश्यकता पड़ी, वहां उन्होंने स्थानीय लोगों, छात्रों और नगर निकायों के साथ मिलकर काम किया। उनके सतत प्रयासों से सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ी है और क्षेत्र के पर्यावरण में उल्लेखनीय सुधार आया है।
श्री मोदी ने इसी तरह मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में तैनात वन विभाग के बीट गार्ड जगदीश प्रसाद अहिरवार के योगदान को भी सराहा। उन्होंने बताया कि गश्त के दौरान अहिरवार ने महसूस किया कि जंगलों में मौजूद अनेक औषधीय पौधों की जानकारी कहीं भी व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं है। इस ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने औषधीय पौधों की पहचान और दस्तावेजीकरण का कार्य शुरू किया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, श्री अहिरवार अब तक 125 से अधिक औषधीय पौधों की पहचान कर चुके हैं। उन्होंने प्रत्येक पौधे की तस्वीर, नाम, उपयोग और मिलने के स्थान से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की। वन विभाग ने इस कार्य को संकलित कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया है, जो आज शोधकर्ताओं, छात्रों और वन अधिकारियों के लिए उपयोगी संदर्भ बन रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की यही भावना अब राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक रूप ले रही है। इसी सोच के तहत देशभर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है, जिससे करोड़ों लोग जुड़ चुके हैं। अब तक देश में 200 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं, जो बढ़ती पर्यावरणीय जागरूकता और सामूहिक संकल्प का सशक्त उदाहरण है।







