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ज़ेलेंस्की की अमेरिका यात्रा, ट्रंप से युद्धविराम वार्ता पर नजरें

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

वॉशिंगटन: रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक अहम कूटनीतिक पहल के तहत यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की अमेरिका पहुंच गए हैं। वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर युद्धविराम और शांति योजना पर विस्तृत बातचीत करेंगे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब लगभग चार वर्षों से जारी युद्ध ने यूक्रेन, रूस और पूरे यूरोप को गहरे राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय संकट में डाल दिया है।

रविवार सुबह ज़ेलेंस्की अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा के मियामी पहुंचे, जहां से वह वाशिंगटन के लिए रवाना हुए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार किए गए एक नए 20-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर केंद्रित होगी। इस प्रस्ताव में चरणबद्ध युद्धविराम, सीमावर्ती इलाकों से सैनिकों की वापसी, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण, और सुरक्षा गारंटी जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।

यूक्रेनी पक्ष का कहना है कि यह प्रस्ताव किसी भी स्थायी समाधान की दिशा में “यथार्थवादी और संतुलित” प्रयास है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि यूक्रेन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा। वहीं, रूस की ओर से अभी तक इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, हालांकि मॉस्को पहले भी पश्चिमी देशों की मध्यस्थता को संदेह की नजर से देखता रहा है।

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत कूटनीति और रूस के साथ उनके पुराने संवाद चैनल इस संघर्ष को रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन युद्ध को लंबा खिंचने से रोकने और वैश्विक अस्थिरता कम करने के लिए ठोस परिणाम चाहता है।

बैठक में ज़ापोरिज़्ज़िया परमाणु संयंत्र की सुरक्षा, डोनबास क्षेत्र की स्थिति, युद्धबंदी नागरिकों की वापसी और युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, नाटो और यूरोपीय देशों की भूमिका को लेकर भी रणनीतिक विमर्श किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस वार्ता पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। यदि ज़ेलेंस्की और ट्रंप के बीच सहमति के ठोस संकेत मिलते हैं, तो यह युद्धविराम की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम समाधान रूस की सहमति और जमीनी हालात पर ही निर्भर करेगा।