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जावेद अख्तर ने ‘धुरंधर’ को प्रोपेगेंडा कहने पर उठाए सवाल, बोले—“हर कहानी की अपनी सोच होती है”

एंटरटेनमेंट डेस्क , अर्पिता कृष्णा 

बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने फिल्म धुरंधर को “प्रोपेगेंडा फिल्म” कहे जाने पर संतुलित प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए पूरे विवाद पर सवाल उठाए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जावेद अख्तर ने कहा कि किसी फिल्म को “प्रोपेगेंडा” कहने से पहले यह समझना जरूरी है कि उसका अर्थ क्या है। उन्होंने सवाल किया कि क्या केवल इसलिए किसी फिल्म को ऐसा कहा जाना चाहिए क्योंकि उसकी कहानी या नजरिया कुछ दर्शकों को पसंद नहीं आता।

उन्होंने आगे कहा कि हर फिल्म और कहानी के पीछे एक विचारधारा या दृष्टिकोण होता है। उनके मुताबिक, फिल्ममेकर को अपनी सोच और विचारों को पर्दे पर प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार है और इसे गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए।

जावेद अख्तर ने धुरंधर की सराहना करते हुए इसे एक अच्छी तरह बनाई गई फिल्म बताया। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दर्शकों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन किसी एक नजरिए के आधार पर फिल्म को जज करना उचित नहीं है।

बताया जा रहा है कि फिल्म धुरंधर और इसके दूसरे भाग को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। जहां एक ओर फिल्म को व्यावसायिक सफलता मिली है, वहीं कुछ वर्गों ने इसे एक खास विचारधारा से जोड़कर देखा है।

इस पूरे विवाद पर जावेद अख्तर ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि सिनेमा एक रचनात्मक माध्यम है, जहां अलग-अलग विचारों और कहानियों के लिए जगह होनी चाहिए। उन्होंने यह भी माना कि उन्हें फिल्म का पहला भाग दूसरे की तुलना में ज्यादा पसंद आया।

गौरतलब है कि हाल के समय में फिल्मों को “प्रोपेगेंडा” कहे जाने का चलन बढ़ा है। ऐसे में जावेद अख्तर का यह बयान रचनात्मक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण पेश करता है।