लोकल डेस्क, संजय दास थारू।
- संरक्षण और रखरखाव के अभाव में श्रद्धालुओं के लिए बनाया गया शौचालय बदहाल
बीरगंज: पर्सा के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटकीय स्थल जिराभवानी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाया गया सार्वजनिक शौचालय संरक्षण, मरम्मत और नियमित देखरेख के अभाव में जर्जर होता जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाया गया यह शौचालय अब खुद ही मरम्मत और संरक्षण की बाट जोह रहा है।
मंदिर परिसर में स्थित शौचालय का एक दरवाजा टूटकर जमीन पर गिरा हुआ दिखाई देता है। शौचालय के अन्य दरवाजे, दीवारें और दूसरी संरचनाएं भी पुरानी होकर कमजोर हो रही हैं। नियमित सफाई और आवश्यक मरम्मत नहीं होने के कारण सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाया गया यह महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा बदहाल हो गया है।
जिराभवानी मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। खासकर धार्मिक पर्व, मेले और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में सार्वजनिक शौचालय की जरूरत और अधिक बढ़ जाती है, लेकिन उपलब्ध शौचालय की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण दर्शनार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार शौचालय के दरवाजे खराब होने के बावजूद समय पर मरम्मत नहीं की गई। सफाई और नियमित निगरानी के अभाव में इसकी भौतिक संरचना लगातार कमजोर होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर सामान्य मरम्मत और देखरेख की जाती तो इसकी स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं, साधु-संतों और स्थानीय लोगों के लिए सार्वजनिक शौचालय जरूरी सुविधा है। लेकिन शौचालय की खराब स्थिति के कारण इसके इस्तेमाल में परेशानी हो रही है। बाहर से आने वाले दर्शनार्थी धार्मिक स्थल पर स्वच्छ, साफ और व्यवस्थित वातावरण की उम्मीद करते हैं। ऐसे में बुनियादी सुविधा की खराब स्थिति से मंदिर की व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए सार्वजनिक शौचालय की उचित व्यवस्था जरूरी है। लेकिन जर्जर संरचना और सफाई के अभाव के कारण सभी वर्ग के दर्शनार्थियों को असुविधा हो रही है।
धार्मिक स्थल की सुविधाओं के रखरखाव पर सवाल
जिराभवानी मंदिर पर्सा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, मंदिर परिसर की सफाई और जरूरी सुविधाओं की उचित व्यवस्था का धार्मिक स्थल के वातावरण पर सीधा प्रभाव पड़ता है। लेकिन मंदिर परिसर में ही सार्वजनिक शौचालय की स्थिति खराब होने से धार्मिक एवं पर्यटकीय स्थल की बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने मंदिर के धार्मिक महत्व को देखते हुए परिसर में मौजूद सभी सार्वजनिक संरचनाओं की नियमित निगरानी और मरम्मत की मांग की है। उनका कहना है कि केवल नई संरचनाएं बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहले से बनी सुविधाओं की नियमित देखरेख और संरक्षण भी जरूरी है।
तत्काल मरम्मत की मांग
स्थानीय लोगों ने स्थानीय निकाय, मंदिर प्रबंधन समिति और संबंधित अधिकारियों से सार्वजनिक शौचालय का तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की है। टूटे हुए दरवाजों और अन्य संरचनाओं की मरम्मत के साथ नियमित सफाई, पानी की व्यवस्था और उचित देखरेख सुनिश्चित करने की मांग की गई है। आने वाले धार्मिक पर्व और मेले के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। इसलिए उससे पहले शौचालय सहित मंदिर परिसर की सभी बुनियादी सुविधाओं को व्यवस्थित करना जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थल का विकास केवल मंदिर की मुख्य संरचना तक सीमित नहीं होना चाहिए। स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, बैठने की जगह और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उचित व्यवस्था और उनका रखरखाव भी उतना ही जरूरी है। संबंधित निकाय ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो जर्जर संरचना और खराब हो सकती है। इसलिए श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और उपयोग योग्य शौचालय की व्यवस्था के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।







