लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: मनुष्य का जीवन केवल सुख-सुविधाएँ जुटाने और भौतिक इच्छाओं को पूरा करने के लिए नहीं मिला है। जीवन का प्रत्येक क्षण अनमोल है। जो समय एक बार बीत जाता है, वह फिर लौटकर नहीं आता। इसलिए हमें अपने जीवन के हर पल का सदुपयोग करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि हमारा वास्तविक उद्देश्य क्या है।
उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 सत्र 26-27 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
मनुष्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसे सही और गलत को समझने की बुद्धि मिली है। पशु-पक्षी भी अपना जीवन भोजन, भय और भोग की सीमाओं में जीते हैं, लेकिन मनुष्य के पास विवेक, विचार और आत्मचिंतन की शक्ति है। यदि मनुष्य भी केवल भोग-विलास और इच्छाओं के पीछे भागता रहे, तो उसके जीवन और पशु-जीवन में बहुत अंतर नहीं रह जाता।
धन, संपत्ति और सुख-सुविधाएँ जीवन के साधन हो सकते हैं, लेकिन इन्हें जीवन का अंतिम लक्ष्य मान लेना उचित नहीं है। धन कमाने की दौड़ में यदि मनुष्य अपनी शांति, संस्कार, संबंध और मानवता खो दे, तो ऐसी उपलब्धियाँ अंततः अधूरी ही रह जाती हैं। जीवन में धन से अधिक जरूरी है कि हमारी सोच, नीयत और कर्म अच्छे हों।
हमें यह भी याद रखना चाहिए कि मन और इंद्रियाँ हमारे स्वामी नहीं, बल्कि हमारे साधन हैं। जब मनुष्य अपनी इच्छाओं और इंद्रियों का गुलाम बन जाता है, तब वह गलत रास्ते पर जाने लगता है। इसके विपरीत जब वह अपने मन और इंद्रियों को नियंत्रित करके उन्हें अच्छे कार्यों में लगाता है, तब उसका जीवन सार्थक बनने लगता है।
जीवन कब समाप्त हो जाएगा, इसका किसी को पता नहीं। इसलिए कल के भरोसे आज को नहीं छोड़ना चाहिए। प्रत्येक दिन को अच्छे विचार, अच्छे कर्म और सेवा की भावना के साथ जीना चाहिए। दूसरों के लिए उपयोगी बनना, जरूरतमंदों की सहायता करना और अपने भीतर सद्भाव बनाए रखना ही जीवन की सच्ची सफलता है।
वास्तव में मनुष्य के पास सबसे बड़ी पूंजी उसका समय और उसका वर्तमान क्षण है। इसलिए बीते हुए समय का पछतावा करने के बजाय वर्तमान को बेहतर बनाना चाहिए। हर क्षण को ईश्वर की देन मानकर उसका सदुपयोग करें, क्योंकि जीवन का हर क्षण अनमोल है और यही क्षण हमारे भविष्य का निर्माण करता है।







