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जीवन की मूल शक्ति अंतर्मन की एकाग्रता: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: मन की एकाग्रता की शक्ति ही सर्वोपरि है।मन जब एक बिंदु पर एकाग्र हो जाता है तो चमत्कार घटित होते हैं।विद्यार्थी जीवन हो या नौकरी-व्यापार ,समाजसेवा हो या धर्म-अध्यात्म का क्षेत्र-एकाग्रता की शक्ति ही व्यक्ति को सफल बनाती है,यही निर्धारित क्षेत्र में सिद्धि की कुंजी है।

उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् ,रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।मन की शक्तियाँ सूर्य की रश्मियों की भांति होती हैं,जो सामान्यतया बिखरी रहती हैं व इनके साथ दैनिक जीवन के सामान्य क्रियाकलाप चलते रहते हैं,लेकिन जब इन्हीं किरणों को आतिशी शीशे से गुजारा जाता है तो ये ही बिखरी किरणें एक बिंदु पर एकाग्र होकर अपना चमत्कार दिखाती हैं।इनके संपर्क में जो भी कागज,लकड़ी आदि के टुकड़े आते हैं,वे प्रज्ज्वलित होकर अग्निमय हो जाते हैं।सूर्य किरणों की इस प्रचंड शक्ति का रहस्य इनकी एकाग्रता में ही छिपा हुआ रहता है।इसी तरह व्यक्ति के जीवन में मन की एकाग्रता उसे सम्बन्धित क्षेत्र में उत्कर्ष के शिखर तक ले जाती है,लेकिन अधिकांश लोग उसका पूरा लाभ नहीं ले पाते।उनके मन की शक्तियाँ बिखरी रहती हैं।

इस बिखराव के कई कारण हो सकते हैं - ध्येय-निष्ठा का अभाव,पर्याप्त नींद न ले पाना,शारीरिक सक्रियता का अभाव, आहार विहार सम्बन्धी व्यतिक्रम और प्रतिकूल वातावरण।वर्तमान में जीने का प्रयास करें।जो बीत गया,उसमें उलझे रहने का कोई लाभ नहीं होता,इसी तरह भविष्य के बारे में चिंता से कोई प्रयोजन सिद्ध नहीं होता।जब मन भूत में अटका रहता है या भविष्य की चिंता में डूबा रहता है,तो एकाग्रता कठिन हो जाती है।अतः वर्तमान में अपने कर्तव्य-कर्म पर ध्यान को एकाग्र रखें।