Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

जीवन चिंतन ही मनुष्य की सजीवता का चिन्ह: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: सूक्ष्म तत्व प्राण से विनिर्मित है।जड़ और चेतन का सम्मिश्रण प्राण है।जिस प्रकार नीला और पीला रंग मिलने से हरा रंग बनता है।

उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। पानी और मिट्टी का सम्मिश्रित स्वरूप कीचड़ के रूप में परिलक्षित होता है।ठीक उसी प्रकार प्रकृति और पुरुष का,जड़-चेतन का सम्मिश्रण प्राण है।इसी के आधार पर जीवन स्थिर रहता है।जब वह शरीर से पृथक हो जाता है,तो मरण की स्थिति बन जाती है।

यह प्राणतत्व शरीर में भी विद्यमान है और उसका विराट स्वरूप विश्व-ब्रह्माण्ड में भी व्याप्त है।जड़-चेतन की एक मात्रा जब जब आपस में गूंथ जाती है,तो उसे जीव की संज्ञा दी जाती है।वह शारीरगत अवयवों को गति प्रदान करता है,साथ ही अहम की ग्रंथि बन कर चिंतन तंत्र के माध्यम से अपनी चेतना का परिचय देता है।चेतना का गुण है चिंतन।चिंतन को ही सजीवता का चिन्ह माना जाता है।

आस्था,आकांक्षा,भावना,कल्पना , विवेचना आदि उसी के भेद-उपभेद हैं।प्राणवान को साहसी समझा जाता है।पराक्रमी,पुरुषार्थी और जीवट का धनी।महाप्राण प्रतिभावान होते हैं और अल्पप्राण कहकर दीन-दुर्बलों,कायरों का तिरस्कार किया जाता है। वैभववान  होने की तरह प्राणवान होना भी किसी के समर्थ सौभाग्यवान होने का चिन्ह है।ऐसों का वर्तमान सुव्यवस्थित होता है और भविष्य उज्जवल।प्राणतत्व की प्रचुरता भौतिक सफलताओं का कारण बनती है और आध्यात्मिक प्रगति की भी।भौतिक जीवन में प्राणवान व्यक्ति का सर्वत्र वर्चस्व होता है।प्राण-बल से संपन्न व्यक्ति ही संसार समर में विजय हासिल कर पाते हैं।