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जीवन में परेशानी का मुख्य कारण विकृत मानसिकता: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: ईश्वर ने अपने दृढ़ स्वविवेक से सृष्टि का निर्माण किया।अपने निर्माण में उन्होंने हर वस्तु सजीव या निर्जीव, सबका अपना स्थान उपयोगिता ध्यान में रखा।

आज हर तरफ दुःख और पीड़ा क्यों दिखाई देती है ? उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। ऐसा नहीं है कि ईश्वर की सृष्टि निर्माण में त्रुटि है कोई बल्कि हम चीजों को देखने का नजरिया गलत रखते हैं।हमारी सोच में विकृति आ गई है।हम अपनी अपेक्षाओं,वासनाओं और अहंकारों के कारण वस्तुओं और घटनाओं की गलत व्याख्या करते हैं,जिससे दुःख का जन्म होता है। यह दुनिया अपने आप में बुरी नहीं है,बल्कि हमारे अंदर की नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ - ईर्ष्या,क्रोध,मोह आदि ही जीवन को दुःखमय बनाते हैं।

जीवन में जो भी घटित होता,वो हमारे दृष्टिकोण की परीक्षा लेने के लिए होता। यदि हम उन्हें सुधार और आत्मपरिष्कार का अवसर मानें,तो वे वरदान बन जाती हैं।मनुष्य की प्रवृति है कि वह हर चीज को अपने अनुकूल देखना चाहता है।वह चाहता है कि दुनिया उसकी अपेक्षाओं के अनुसार चले,पर जब ऐसा नहीं होता,तब वह दुःखी होता है।मनुष्य के दुःख की सबसे बड़ी वजह है - अपनी मानसिकता की सीमितता और विकृति। हमें अपनी अंतर्दृष्टि को शुद्ध करना होगा।जो व्यक्ति हर परिस्थिति को आत्मविकास के साधन के रूप में लेता है ; वह दुःख से ऊपर उठ जाता है।उसे शांति और आनंद की अनुभूति होती है ; क्योंकि उसने अपने दृष्टिकोण को सही कर लिया होता है।वास्तव में दुःख और परेशानी की जड़ें बाहर नहीं,बल्कि हमारे भीतर छिपी हैं।यदि हम इन्हें पहचानकर सुधार लें तो जीवन स्वतः ही सुखद व निर्मल बन जाएगा।