स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना।
रक्सौल: मनुष्य का जीवन संगीत की धुनों की तरह है जिसमें से विभिन्न प्रकार की सुरों की तरंगें निकलती हैं।संगीत मानव के हृदय के उमंग,उत्साह,और माधुर्य को प्रदर्शित करता है। उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् ,रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
मधुर जीवन संगीत की ध्वनि मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षक, रोग-निवारक व आयुवर्द्धक होती है,यह चिकित्सा उसी पर कारगर है,जो रूचि रखता हो। रागों से आत्मिक सुख की अनुभूति होती है,जिसके कारण इसे चिकित्सा पद्धति में उपयुक्त माना गया है।वेदों में शरीर के सात चक्रों का वर्णन किया गया है,जो मानव शरीर के विभिन्न भागों का संचालन करते हैं। संगीत के सात सुरों का इन सात चक्रों पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।आर्युवेद के अनुसार वात, पित्त और कफ दोष दिन के चौबीस घंटों के दौरान चक्रीय क्रम में कार्य करते हैं।प्रातःकाल व सायंकाल में शरीर में अधिक शिथिलता रहती है। शिथिलता के कारण शरीर पर काफी दबाव रहता है।
अतः इस समय संगीत शरीर को स्फूर्तिवान करता है। मनुष्य के कार्य,उसकी भावनाओं,विचारों का भी जितना व्यापक आधार होगा,उतनी ही क्षमताएं, शक्तियाँ भी व्यापक बनेंगी। उनके लिए असंभव नाम का कोई शब्द नहीं रह जाता और प्रकृति भी अपने नियमों का व्यतिरेक कर के उन्हें रास्ता देती है।ईश्वरप्रदत कल्पनाशक्ति,विचारशक्ति, भावशक्ति,इच्छाशक्ति के महत्व को समझें एवं अपने व्यक्तित्व के विकास में इनका उपयोग करें तथा सृजनात्मकता की मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया को समझते हुए अपनी सृजनात्मक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर हों। चरित्र निर्माण जीवन प्रबंधन का एक आधारभूत पहलू है।इनसे उक्त व्यक्ति एक आदर्श, एक मिसाल पेश करता है सामाजिक जीवन में और आगे चल कर श्रेष्ठ नागरिक तथा प्रेरक नेतृत्व के रूप में समाज का मार्गदर्शन करता है।जीवन पथ पे संगीत की मधुर ध्वनि की अनुभूति करते रहें एवं जीवन को संगीतमय बनाएं।







