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ज्ञानपीठ सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

नई दिल्ली: ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का 89 वर्ष की आयु में मंगलवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से रायपुर स्थित एम्स में भर्ती थे, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। एम्स प्रशासन के अनुसार, वह गंभीर श्वसन रोग से पीड़ित थे और उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी।

एम्स प्रबंधन ने बताया कि विनोद कुमार शुक्ल इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) और गंभीर निमोनिया से ग्रसित थे। इसके अलावा उन्हें टाइप-2 मधुमेह और उच्च रक्तचाप की भी शिकायत थी। लंबे समय से चल रहे इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका।

राजनांदगांव में हुआ था जन्म

विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हुआ था। उन्होंने शिक्षा को अपना पेशा चुना, लेकिन उनका अधिकांश जीवन साहित्य सृजन को समर्पित रहा। सरल भाषा, गहरी संवेदनशीलता और विशिष्ट शिल्प उनके लेखन की पहचान रही।

2024 में मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार

हिंदी साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए वर्ष 2024 में उन्हें 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था। वह ज्ञानपीठ से सम्मानित होने वाले हिंदी के 12वें साहित्यकार और छत्तीसगढ़ के पहले लेखक थे। हाल ही में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एम्स जाकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी।

साहित्यिक योगदान

कवि, कथाकार और उपन्यासकार के रूप में विनोद कुमार शुक्ल ने हिंदी साहित्य को नई दृष्टि दी। उनकी पहली कविता ‘लगभग जयहिंद’ 1971 में प्रकाशित हुई थी। ‘नौकर की कमीज’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ और ‘खिलेगा तो देखेंगे’ जैसे उपन्यासों ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। ‘नौकर की कमीज’ पर फिल्मकार मणिकौल ने फिल्म भी बनाई थी, जबकि ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भारतीय साहित्य को दी नई दिशा

उनका लेखन मध्यवर्गीय जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियों, मानवीय संवेदनाओं और लोक तत्वों से समृद्ध रहा। प्रयोगधर्मी शैली और गहरी भावनात्मक पकड़ के कारण उनका साहित्य न केवल हिंदी, बल्कि वैश्विक साहित्य में भी विशिष्ट स्थान रखता है।

प्रमुख सम्मान

विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार, रजा पुरस्कार, शिखर सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया। वर्ष 2021 में उन्हें साहित्य अकादमी का सर्वोच्च सम्मान ‘महत्तर सदस्य’ भी बनाया गया था।

प्रमुख कृतियां

उनकी प्रमुख रचनाओं में कविता संग्रह ‘लगभग जयहिंद’, ‘सब कुछ होना बचा रहेगा’, ‘कभी के बाद अभी’ और उपन्यास ‘नौकर की कमीज’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ शामिल हैं। इसके अलावा कहानी संग्रह ‘पेड़ पर कमरा’ और ‘एक कहानी’ भी उनकी चर्चित कृतियों में गिने जाते हैं।

हिंदी साहित्य जगत में विनोद कुमार शुक्ल का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।