नेशनल डेस्क, शुभम कुमार तिवारी।
- मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले की जांच तेज, अभियोजन पक्ष ने मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बरामदगी का दिया हवाला।
मुंबईI अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में मुंबई की एक अदालत ने तीनों आरोपियों की पुलिस हिरासत 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (AEC) ने बुधवार को आरोपियों को अदालत में पेश किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की साजिश और उससे जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाने के लिए आरोपियों से आगे पूछताछ जरूरी है।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों आरोपियों को राजस्थान के कोटा से मुंबई लाया गया था। उन्हें बुधवार सुबह करीब चार बजे मेडिकल जांच के बाद अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मामले की जांच के लिए पुलिस को अतिरिक्त समय देने की अनुमति दी।
गिरफ्तारी के समय को लेकर अदालत ने मांगा स्पष्टीकरण
सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपियों की गिरफ्तारी के समय को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। एक आरोपी ने दावा किया कि उसे 19 अक्टूबर की सुबह गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जांच अधिकारी और अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपियों से पूछताछ और मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि के लिए पुलिस हिरासत आवश्यक है। जांच एजेंसी का दावा है कि फायरिंग की घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बरामद करने की जरूरत है। इन उपकरणों की जांच से कथित साजिश और उसमें शामिल लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
दूसरे राज्यों तक पहुंच सकती है जांच
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले से जुड़े कुछ संदिग्धों के महाराष्ट्र के बाहर भी संपर्क होने की आशंका है। इसी कारण जांच टीम को कई स्थानों पर जाकर पूछताछ और सत्यापन करना पड़ सकता है।
जांच एजेंसी ने घटना के पीछे की मंशा का पता लगाने को भी महत्वपूर्ण बताया है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग की घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें कथित रूप से शामिल लोगों के बीच क्या संबंध थे।
बचाव पक्ष ने पुलिस हिरासत का किया विरोध
आरोपियों के वकीलों ने पुलिस की मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष का तर्क था कि पुलिस हिरासत बढ़ाने के लिए जांच एजेंसी की ओर से पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बरामदगी के आधार पर पुलिस हिरासत को उचित नहीं ठहराया जा सकता, विशेषकर जब अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच भी बाकी हो।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपियों को राजस्थान से मुंबई लाते समय वे पुलिस के साथ थे और इस दौरान वे पहले से पुलिस की निगरानी में थे। वकीलों ने अदालत से अनुरोध किया कि तीनों आरोपियों को आगे की पुलिस पूछताछ के बजाय न्यायिक हिरासत में भेजा जाए।
अदालत ने 31 अक्टूबर तक बढ़ाई हिरासत
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों की पुलिस कस्टडी 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी। इसके साथ ही जांच एजेंसी को फायरिंग की घटना, कथित हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े पहलुओं की जांच जारी रखने की अनुमति मिली।
अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों को आरोपियों से मिलने के लिए थोड़े समय की अनुमति भी दी, ताकि वे मामले के संबंध में आवश्यक निर्देश दे सकें।
फिलहाल, जांच का मुख्य केंद्र घटना के पीछे की कथित मंशा, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पुष्टि और मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की संभावित भूमिका है। मामले में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।







