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ट्रंप का ईरान पर बड़ा बयान, बोले- जल्द खत्म होगा युद्ध |

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ नए अमेरिकी सैन्य हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मौजूदा टकराव बहुत जल्द खत्म हो सकता है और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आने की उम्मीद है। रविवार को जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ फिर सैन्य कार्रवाई हो सकती है, तो उन्होंने कहा कि वह इस संभावना से इनकार नहीं करना चाहते, लेकिन इस बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ कहना भी नहीं चाहते।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ तेहरान को अलग-थलग करने के लिए चलाए जा रहे आर्थिक अभियान में भी बढ़त हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही जीत हासिल कर चुका है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिकी कार्रवाई रुक गई है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मौजूदा टकराव के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, ईरान की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गई है और अमेरिका दोनों मोर्चों पर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध के जल्द खत्म होने को तेल की कीमतों में संभावित गिरावट से भी जोड़ा। पीजीए टूर प्रेसिडेंट्स कप के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका यह युद्ध बहुत जल्द जीत लेगा और इसके समाप्त होते ही तेल की कीमतें युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर तक नीचे आ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि ईरान के पास परमाणु हथियार न रहे। बाद में व्हाइट हाउस से इलिनोइस रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में भी ट्रंप ने कहा कि ईरान के हार मानने और युद्ध समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी।

ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि रात के दौरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से रिकॉर्ड मात्रा में तेल बाहर ले जाया गया और यह मात्रा युद्ध शुरू होने से पहले होने वाली आवाजाही से भी अधिक थी। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। इस मार्ग से ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आने पर एशियाई देशों में ऊर्जा की कीमतों के साथ-साथ माल ढुलाई और बीमा लागत पर भी असर पड़ सकता है।

ईरान के साथ बातचीत की संभावना को लेकर ट्रंप ने कहा कि इस सप्ताह दोनों पक्षों के बीच आगे बातचीत हो सकती है, लेकिन उन्होंने तेहरान के नए प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उसका मौजूदा प्रस्ताव उस समझौते के अनुरूप नहीं है जिसे वह स्वीकार करना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा कि शायद अमेरिका करीब एक साल पहले इस तरह के प्रस्ताव पर सहमत हो जाता, लेकिन ईरान ने स्थिति का सही आकलन नहीं किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ईरान के खिलाफ हमले दोबारा शुरू करने पर विचार कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि वह इस संभावना पर लगातार विचार करते रहते हैं।

दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि उनका देश बातचीत में शामिल है और परमाणु कार्यक्रम की सीमाओं को लेकर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में अपनी मांगें रख रहा है। पेजेशकियान के अनुसार, तेहरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को देश में पहुंच देने के मुद्दे पर भी बातचीत कर सकता है, लेकिन इसके लिए अमेरिका की ओर से यह आश्वासन जरूरी होगा कि वह ईरान की सरकार बदलने की कोशिश नहीं कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उस पर हमला किया जाता है तो वह अपनी रक्षा करेगा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी किसी नए हमले की स्थिति में कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी नए हमले का सामना करेगा, भले ही संघर्ष विनाशकारी युद्ध का रूप क्यों न ले ले। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान कूटनीति के लिए तैयार है और अब आगे का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर करता है। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने की चिंता बनी हुई है। इस मार्ग में लंबे समय तक किसी तरह की बाधा आने पर एशिया में ऊर्जा कीमतों, माल ढुलाई शुल्क और बीमा लागत में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।