विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वॉशिंगटन। अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के रुझान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। एक नए सर्वे के मुताबिक, भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का बड़ा हिस्सा आगामी चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने के पक्ष में है। प्रतिनिधि सभा के चुनाव में 66 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को वोट देने की इच्छा जताई, जबकि 22 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने की बात कही।
सीनेट चुनाव को लेकर भी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का रुझान डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर ज्यादा दिखाई दिया। सर्वे में 66 प्रतिशत लोगों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की बात कही, जबकि सिर्फ 18 प्रतिशत रिपब्लिकन उम्मीदवारों को वोट देने के इच्छुक नजर आए। आंकड़ों से पता चलता है कि एशियाई-अमेरिकी समुदायों के बीच भारतीय मूल के मतदाताओं में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति समर्थन काफी मजबूत बना हुआ है।
इन आंकड़ों की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक हिस्से में ट्रंप के समर्थन में बढ़ोतरी देखी गई थी। उस समय एक सर्वे में करीब 32 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने ट्रंप को वोट देने की योजना बताई थी। भारतीय-अमेरिकी पुरुषों में यह समर्थन और ज्यादा था और लगभग 40 प्रतिशत पुरुषों ने ट्रंप के पक्ष में मतदान की इच्छा जताई थी। हालांकि, नए रुझानों में ट्रंप के समर्थन में कमी दिखाई दे रही है, जबकि करीब 20 लाख भारतीय-अमेरिकी अब भी डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत समर्थक माने जाते हैं।
सर्वे में भारतीय-अमेरिकियों और व्यापक एशियाई-अमेरिकी मतदाताओं के लिए महंगाई और रोजमर्रा की बढ़ती लागत सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल रही। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाएं, अपराध और नस्लवाद जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बताए गए। जीवन-यापन की लागत और महंगाई से निपटने के मामले में 44 प्रतिशत लोगों ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर अधिक भरोसा जताया, जबकि सिर्फ 18 प्रतिशत ने रिपब्लिकन पार्टी को इस मुद्दे पर बेहतर विकल्प माना।
विदेश नीति और युद्ध भी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हैं। सर्वे में 78 प्रतिशत लोगों ने युद्ध और विदेश नीति को महत्वपूर्ण या बेहद महत्वपूर्ण बताया। यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ईरान के साथ चल रहे महंगे संघर्ष को लेकर भी चर्चा में है। प्रमुख मुद्दों पर भरोसे की बात करें तो एशियाई-अमेरिकी मतदाताओं ने कई मामलों में रिपब्लिकन की तुलना में डेमोक्रेटिक पार्टी को बेहतर विकल्प माना।
एशियाई-अमेरिकी समुदाय में डोनाल्ड ट्रंप को लेकर भी नकारात्मक राय सामने आई है। सर्वे में करीब 70 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप के प्रति प्रतिकूल विचार व्यक्त किए। 2026 की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल 71 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष के प्रदर्शन को अस्वीकार किया। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रशासन की आर्थिक नीतियों, खासकर टैरिफ, पर असहमति जताई। इसके साथ ही आव्रजन नीति को लेकर भी भारतीय-अमेरिकी समुदाय में असंतोष देखने को मिला।
हालांकि, भारतीय-अमेरिकियों की डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ाव की पहचान में भी कुछ कमी आई है। 2020 में 52 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने खुद को डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ा बताया था, जबकि 2026 में यह आंकड़ा घटकर 46 प्रतिशत हो गया। इसके बावजूद यह संख्या रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ाव रखने वालों से काफी अधिक है, क्योंकि 2026 में केवल 19 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने खुद को रिपब्लिकन बताया। वहीं, नस्लवाद और अल्पसंख्यकों के प्रति कथित असहिष्णुता भी समुदाय की चिंता बनी हुई है। रिपब्लिकन पार्टी से खुद को नहीं जोड़ने वाले भारतीय-अमेरिकियों में 27 प्रतिशत ने कहा कि वे पार्टी का समर्थन इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि पार्टी अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णु है। यह आंकड़ा 2024 की तुलना में 10 प्रतिशत अंक अधिक है।







