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ठंड में स्ट्रोक का खतरा: बीपी ऊंचा, खून गाढ़ा

हेल्थ डेस्क, मुस्कान कुमारी।

नई दिल्ली। उत्तर और मध्य भारत में ठंडी लहर ने दस्तक दे दी है, जिससे स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ रहा। न्यूरोलॉजिस्ट्स चेताते हैं कि कम तापमान ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, खून गाढ़ा करता है, खासकर बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए घातक साबित हो सकता।

जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी के अध्ययन के मुताबिक, तापमान गिरने पर स्ट्रोक के मामले बढ़ जाते हैं, यहां तक कि हल्की ठंड भी इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम दोगुना कर सकती है। फोर्टिस गुड़गांव के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. साहिल कोहली ने बताया कि ठंड में शरीर हीट बचाने के लिए वेसल्स सिकुड़ जाते हैं, जिससे हृदय पर दबाव पड़ता और क्लॉट बनने का खतरा बढ़ता।

शरीर का 'सरवाइवल मोड': ठंड की चुपके साजिश

ठंड पड़ते ही शरीर गर्मी बचाने के मोड में चला जाता है। वेसल्स कस जाते हैं, ब्लड प्रेशर 10-30 एमएमएचजी तक उछल जाता है। डॉ. कोहली कहते हैं, "यह हाई बीपी वीक ब्रेन वेसल्स को फाड़ सकता है, खासकर सुबह की सर्द हवा में।" स्ट्रेस हार्मोन रिलीज से हार्ट रेट तेज होती, जो हार्ट अटैक या स्ट्रोक को ट्रिगर कर देती।

खून गाढ़ा हो जाता, ऑक्सीजन ब्रेन तक कम पहुंचती। इससे इस्केमिक (क्लॉट) और हेमोरेजिक (ब्लीडिंग) दोनों स्ट्रोक का खतरा दोगुना। विंटर में डिहाइड्रेशन आम, क्योंकि प्यास कम लगती, प्लाज्मा वॉल्यूम घटता, क्लॉटिंग प्रोटीन बढ़ते। प्लेटलेट्स एक्टिव हो जाते, थ्रोम्बोटिक स्टेट बनता।

जोखिम वाले ग्रुप: बुजुर्ग, हाई बीपी वाले सबसे खतरे में

60 साल से ऊपर के लोग, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, हार्ट डिजीज, पुराना स्ट्रोक या टीआईए वाले, स्मोकर्स, हाई कोलेस्ट्रॉल, क्रॉनिक किडनी डिजीज या अकेले रहने वाले सबसे ज्यादा खतरे में। डॉ. कोहली चेताते हैं, "दवा छूटना, अल्कोहल बढ़ना या अचानक ठंड एक्सपोजर जोखिम और बढ़ा देता।" इमोबिलिटी से डीवीटी का खतरा, लेग्स में ब्लड पूलिंग।

वार्निंग साइन्स: फास्ट रूल के साथ विंटर अलर्ट

क्लासिक स्ट्रोक साइन्स: फेस ड्रूपिंग, आर्म/लेग वीकनेस, स्पीच डिफिकल्टी, टाइम टू कॉल इमरजेंसी। ठंड में एक्स्ट्रा: अचानक कन्फ्यूजन, ड्रोवजिनेस, कोल्ड एक्सपोजर के बाद सीवियर हेडेक, बैलेंस लॉस, ब्लर्ड विजन, हाई बीपी के साथ वॉमिटिंग, चेस्ट डिस्कंफर्ट।

बचाव के आसान उपाय: घर में गर्मी, हल्की हलचल

इंडोर टेम्परेचर स्टेबल रखें, लेयर्स में कपड़े पहनें - हेड, नेक, हैंड्स कवर। सुबह वॉक अवॉइड, धूप में निकलें। हाई बीपी वालों के लिए रेगुलर मॉनिटरिंग, दवा न छोड़ें, रीडिंग ऊंची तो डॉक्टर से। हाइड्रेट रहें - वार्म सूप, हर्बल टी। इंटेंस एक्सरसाइज न करें, जेंटल इंडोर मूवमेंट। हर 30-45 मिनट उठें, सिट न रहें।

ठंडी लहर में ये छोटे कदम जान बचा सकते हैं, खासकर हाई रिस्क ग्रुप्स के लिए। डॉ. कोहली जोर देते हैं, "विंटर में सर्कुलेशन बनाए रखना ही स्ट्रोक से बचाव की कुंजी।"