स्टेट डेस्क, श्रेयांश पराशर l
तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव सामने आया है। स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में शानदार जीत दर्ज कर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) से सत्ता छीन ली है। यह वही नगर निगम है, जिस पर LDF पिछले चार दशकों से अधिक समय से लगातार काबिज रहा था। राजधानी में सत्ता परिवर्तन को वाम मोर्चे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
तिरुवनंतपुरम केवल केरल की प्रशासनिक राजधानी ही नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति का अहम केंद्र भी है। यह क्षेत्र लंबे समय से वाम और कांग्रेस के प्रभाव वाला माना जाता रहा है। इसी लोकसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर लगातार चार बार सांसद चुने जा चुके हैं। ऐसे में नगर निगम में बीजेपी की जीत ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह झकझोर दिया है।
बीजेपी की इस सफलता को सिर्फ एक स्थानीय निकाय की जीत तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नगर निगम जैसे बड़े शहरी निकाय में सत्ता हासिल करना विधानसभा चुनावों में कुछ सीटें जीतने से कहीं अधिक असरदार संकेत देता है। यह दर्शाता है कि शहरी मतदाता अब परंपरागत राजनीतिक ध्रुवीकरण से हटकर नए विकल्पों की ओर देख रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ऐतिहासिक जीत पर पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। उन्होंने इसे “जनता के विश्वास और विकास की राजनीति की जीत” बताया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह परिणाम केरल में पार्टी के बढ़ते जनाधार और संगठनात्मक मजबूती का प्रमाण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बदलाव आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है। केरल की राजनीति, जो अब तक LDF और UDF के बीच सिमटी रही थी, अब एक नए त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ती दिख रही है।







