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थाने से 'दलालों' की विदाई, बिहार DGP का चक्रव्यूह

स्टेट डेस्क, एन के सिंह।

अब खाकी और जनता के बीच नहीं होगा कोई 'बिचौलिया'।दलाल रसूख और प्रलोभन के दम पर निर्दोषों को संगीन मामलों में फंसाने का गंदा खेल भी खेलते रहे हैं।

पटना/मोतिहारी: बिहार की पुलिसिंग व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। अक्सर थानों के बाहर मंडराने वाले और खाकी के रसूख का डर दिखाकर आम जनता की जेब ढीली करने वाले 'सफेदपोश दलालों' के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने एक ऐसा 'डिजिटल और प्रशासनिक चक्रव्यूह' तैयार किया है, जिससे थानों में बिचौलियों की 'नो एंट्री' पक्की हो गई है।
 

डिजिटल पहरा: सीसीटीवी फुटेज और आगंतुक रजिस्टर का होगा मिलान, पकड़ी जाएगी हर संदिग्ध हलचल।

थानेदारों पर तलवार: दलालों को संरक्षण देने वाले थानाध्यक्षों पर गिरेगी सीधी गाज, होगी विभागीय कार्रवाई।

पंजी में दर्ज होगा 'सच': थाने आने वाले हर शख्स का नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य।
 
पारदर्शिता का संकल्प: अनुसंधान में पैसे और प्रलोभन के बल पर निर्दोषों को फंसाने के खेल पर पूर्ण विराम।

एक नई व्यवस्था की कहानी: जब खाकी बनेगी जनता की असली मददगार

वर्षों से बिहार के थानों की एक अघोषित सच्चाई रही है—'बिचौलिया'। यह वह कड़ी है जो गरीब, लाचार और कानून से अनभिज्ञ लोगों को मदद का झांसा देकर न केवल आर्थिक शोषण करती है, बल्कि जांच (अनुसंधान) को भी प्रभावित करती है। कई बार ये दलाल रसूख और प्रलोभन के दम पर निर्दोषों को संगीन मामलों में फंसाने का गंदा खेल भी खेलते रहे हैं।

DGP का कड़ा संदेश: "छवि खराब की तो खैर नहीं"

डीजीपी विनय कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस की छवि धूमिल करने वाले इन तत्वों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके नए आदेश के मुताबिक, अब हर थाने में एक 'आगंतुक पंजी' 

आगंतुक पंजी संधारित की जाएगी। इसमें केवल नाम दर्ज नहीं होगा, बल्कि थाने आने का ठोस कारण भी बताना होगा।

सीसीटीवी बनेगा 'तीसरी आंख'

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी मजबूती है—तकनीक का इस्तेमाल। अब वरीय पुलिस अधिकारी दफ्तर में बैठकर किसी भी थाने का सीसीटीवी फुटेज देख सकेंगे। अगर रजिस्टर में दर्ज नामों और सीसीटीवी में दिखने वाले चेहरों में अंतर मिला, या कोई व्यक्ति बिना कारण बार-बार थाने के चक्कर काटता दिखा, तो तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

थानाध्यक्षों की जवाबदेही: अब बहानेबाजी नहीं चलेगी

नए फरमान ने सीधे तौर पर थानाध्यक्षों (SHO) की कुर्सी को जवाबदेही के घेरे में ला खड़ा किया है। यदि किसी थाने के आसपास दलालों का जमावड़ा पाया गया, तो इसके लिए सीधे तौर पर वहां के थानेदार को जिम्मेदार माना जाएगा। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जनता में जगी न्याय की उम्मीद

पुलिस की इस पहल से आम नागरिकों में खुशी की लहर है। मोतिहारी सहित पूरे बिहार के ग्रामीण इलाकों में, जहाँ लोग थाने जाने से कतराते थे, अब उन्हें विश्वास होने लगा है कि उन्हें अपनी बात रखने के लिए किसी 'तीसरे पक्ष' की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिचौलियों को दी जाने वाली अवैध रकम अब जनता की जेब में बचेगी और न्याय प्रक्रिया सुलभ होगी।

"यह कदम बिहार पुलिस में आम आदमी का विश्वास बहाल करने और न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। अब थाने की चौखट पर सिर्फ न्याय की दस्तक होगी, दलालों की नहीं।"

 पुलिस मुख्यालय, बिहार