स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना।
नई दिल्ली/मधुबनी। भारतीय न्याय व्यवस्था के नए युग पर आधारित पुस्तक ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ का भव्य विमोचन नई दिल्ली स्थित हिंदी भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में संपन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी, पद्मश्री एवं पद्म भूषण से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय, आरएसएस के मुखपत्र ‘पाञ्चजन्य’ के संपादक श्री हितेश शंकर, भाजपा के मुखपत्र ‘कमल संदेश’ के संपादक श्री शिवशक्ति बख्शी तथा छत्तीसगढ़ भाजपा के मुखपत्र ‘दीप कमल’ के संपादक एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा के कर-कमलों से हुआ।
यह पुस्तक भारत के तीन नए आपराधिक कानूनों - भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—पर आधारित है, जो 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू हुए। इन कानूनों ने क्रमशः ब्रिटिशकालीन भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का स्थान लिया है। पुस्तक में इन नए कानूनों का सरल, व्यावहारिक एवं व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक की प्रस्तावना पद्म भूषण श्री राम बहादुर राय ने लिखी है। वहीं पुस्तक के लिए केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी, संसद की कार्मिक, लोक शिकायत, कानून एवं न्याय संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री बृजलाल, जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री संजय कुमार झा तथा झंझारपुर के सांसद श्री रामप्रीत मंडल ने अपने शुभकामना संदेश एवं बधाई पत्र प्रदान किए हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. राजभूषण चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने औपनिवेशिक कानूनों से मुक्त होकर अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप तीन नए आपराधिक कानून देश को समर्पित किए हैं। उन्होंने कहा कि ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ इन नए कानूनों को समझने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी पुस्तक है और यह विधि के विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं, शोधकर्ताओं तथा आम नागरिकों के लिए समान रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।
श्री राम बहादुर राय ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इसमें पौराणिक न्याय व्यवस्था से लेकर वर्तमान भारतीय न्याय प्रणाली तक की यात्रा का गंभीर एवं रोचक वर्णन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल कानून की व्याख्या नहीं करती, बल्कि भारतीय न्याय दर्शन की ऐतिहासिक एवं वैचारिक पृष्ठभूमि को भी सरल भाषा में प्रस्तुत करती है।
पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर ने कहा कि यह पुस्तक भारतीय न्याय व्यवस्था में आए ऐतिहासिक परिवर्तन को राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से समझने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
कमल संदेश के संपादक श्री शिवशक्ति बख्शी ने कहा कि सरल एवं सहज भाषा में लिखी गई यह पुस्तक नए आपराधिक कानूनों को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दीप कमल के संपादक एवं मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा ने कहा कि यह पुस्तक न्याय व्यवस्था के बदलते स्वरूप को समझने के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है और युवा अधिवक्ताओं एवं विधि के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है।
पुस्तक के लेखक सुमित कुमार मिश्र दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता हैं। वे पूर्व में दूरदर्शन, नई दिल्ली में कार्य कर चुके हैं तथा डीडी किसान चैनल के शुभारंभ से जुड़े कार्यों में अपना योगदान दे चुके हैं, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया था। सुमित कुमार मिश्र बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड स्थित कटैया गांव के निवासी हैं।
लेखक की इस उपलब्धि से उनके पैतृक गांव कटैया सहित पूरे मधुबनी जिले में हर्ष का वातावरण है। स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
समारोह में दिल्ली विधानसभा के सदस्य, भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय एवं दिल्ली प्रदेश के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, पत्रकार, साहित्यकार, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग 850 लोगों ने भाग लेकर पुस्तक के प्रति अपनी रुचि एवं भारतीय न्याय व्यवस्था के नए अध्याय के प्रति उत्साह व्यक्त किया।







