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दुनिया के 'सबसे बुजुर्ग' नवजात ने लिया जन्म

विदेश डेस्क, मुस्कान कुमारी |

30 साल पुराने फ्रीज भ्रूण से हुआ चमत्कार, ओहायो में खुशी की लहर

अमेरिका: ओहायो में 26 जुलाई 2025 को एक ऐसी घटना हुई, जो विज्ञान और मानवता के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो रही है। लिंडसे और टिम पियर्स के घर थैडियस डैनियल पियर्स नाम के बच्चे ने जन्म लिया, जिसे दुनिया का सबसे 'उम्रदराज' नवजात कहा जा रहा है। यह बच्चा 1994 में फ्रीज किए गए भ्रूण से पैदा हुआ, जो करीब 30 साल तक सुरक्षित रहा। यह उपलब्धि न केवल मेडिकल साइंस की एक बड़ी छलांग है, बल्कि एक इंसानी कहानी भी है, जो उम्मीद और प्यार से भरी है।

लिंडा की इच्छा से शुरू हुई अनोखी यात्रा

इस चमत्कार की शुरुआत 1990 के दशक में हुई, जब लिंडा आर्चर्ड और उनके पति ने प्रेग्नेंसी की दिक्कतों के चलते IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक को अपनाया। 1994 में चार भ्रूण बनाए गए, जिनमें से एक से लिंडा की बेटी का जन्म हुआ। यह बेटी अब 30 साल की है और एक 10 साल के बच्चे की मां है। बाकी तीन भ्रूण फ्रीज कर स्टोर कर दिए गए। बाद में लिंडा का तलाक हो गया, और उन्हें इन भ्रूणों की कस्टडी मिली। लिंडा ने फैसला किया कि ये भ्रूण किसी जरूरतमंद और सही परिवार को मिलने चाहिए।

गोद लेने की प्रक्रिया में मिले पियर्स दंपति

लिंडा ने एक क्रिश्चियन एजेंसी के जरिए "ओपन एम्ब्रियो एडॉप्शन" प्रोग्राम को चुना। उनकी इच्छा थी कि भ्रूण एक श्वेत, विवाहित ईसाई जोड़े को मिले। इसी सिलसिले में उनकी मुलाकात लिंडसे और टिम पियर्स से हुई। यह दंपति पिछले सात साल से माता-पिता बनने की कोशिश में था। लिंडसे और टिम ने इस भ्रूण को अपनाने का फैसला किया और Rejoice Fertility क्लीनिक की मदद से प्रक्रिया शुरू की।

चुनौतीपूर्ण तकनीक से मिली सफलता

भ्रूण को 1994 में पुरानी "स्लो-फ्रीजिंग" तकनीक से फ्रीज किया गया था, जो आज के आधुनिक तरीकों से अलग और जटिल था। इसे पिघलाना और उपयोग करना आसान नहीं था, लेकिन विशेषज्ञों की मेहनत रंग लाई। लिंडसे ने सफलतापूर्वक गर्भधारण किया, और 26 जुलाई को थैडियस का जन्म हुआ। यह बच्चा जैविक रूप से लिंडा की 30 साल की बेटी का भाई है, जो इस कहानी को और भी रोचक बनाता है।

लिंडा का भावुक बयान

अब 62 साल की लिंडा ने कहा, "मेरा मकसद रिकॉर्ड बनाना नहीं था। यह मेरे भ्रूण को एक प्यार करने वाले परिवार में जीवन देने की इच्छा का नतीजा है।" उनके लिए यह विज्ञान का चमत्कार है, जो नई उम्मीदें जगाता है। थैडियस का जन्म न केवल एक परिवार के सपने को पूरा करता है, बल्कि IVF और एम्ब्रियो क्रायोप्रिजर्वेशन की प्रगति को भी दर्शाता है।

तकनीक और संवेदना का संगम

यह घटना दिखाती है कि कैसे आधुनिक तकनीक और इंसानी भावनाएं मिलकर असाधारण परिणाम दे सकती हैं। लिंडा की बेटी, जो अब दादी बन चुकी है, और थैडियस के माता-पिता लिंडसे-टिम, इस कहानी के हीरो हैं। थैडियस का जन्म न केवल एक बच्चे के आने की खुशी लेकर आया, बल्कि यह भी साबित किया कि विज्ञान की मदद से सपने साकार हो सकते हैं।

एक नई शुरुआत की कहानी

थैडियस डैनियल पियर्स का जन्म ओहायो में एक साधारण घर में हुआ, लेकिन इसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। यह कहानी मेडिकल साइंस की उपलब्धि से कहीं बढ़कर है—यह एक महिला की इच्छा और एक दंपति के सपने का मिलन है, जो एक नए जीवन को जन्म देता है। विज्ञान के इस करिश्मे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि तकनीक के साथ-साथ मानवीय संवेदना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।