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धर्मांतरण राष्ट्रान्तरण है, देशद्रोह मानकर मिले आजीवन कारावास

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

मोतिहारी की धरती से जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने फूँका सनातन का शंखनाद; समान नागरिक संहिता और स्वदेशी अपनाने का किया आह्वान

पूर्वी चंपारण: रामनवमी के पावन अवसर पर विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित भव्य शोभा यात्रा ने आज उस समय ऐतिहासिक रूप ले लिया, जब काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने मोतिहारी की धरती से हुंकार भरी। राधा कृष्ण सेवा संस्थान ट्रस्ट और युवा समाजसेवी यमुना सिकारिया के आतिथ्य में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान महाराज जी ने वैश्विक उथल-पुथल के बीच 'सनातन संस्कृति' को विश्व शांति का एकमात्र विकल्प बताया।

धर्मांतरण पर प्रहार: "जब्त हो संपत्ति, मिले उम्रकैद"

जगतगुरु ने धर्मांतरण को देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि यह केवल धर्म बदलना नहीं, बल्कि 'राष्ट्रान्तरण' है। उन्होंने कड़े शब्दों में मांग की कि
 धर्मांतरण कराने वालों को आजीवन कारावास की सजा दी जाए।
ऐसे तत्वों की संपत्ति तत्काल जब्त की जाए।

शिक्षा और चिकित्सा के नाम पर देश के नागरिकों का मन-मस्तिष्क बदलकर उन्हें राष्ट्र के विरुद्ध खड़ा करना देशद्रोह की श्रेणी में आता है।

स्वदेशी अपनाओ, आतंकवाद मिटाओ: पेप्सी-कोला का गणित

महाराज जी ने देश की अर्थव्यवस्था को विदेशी चंगुल से बचाने के लिए एक बड़ा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि पेप्सी जैसी विदेशी कोल्ड ड्रिंक की लागत मात्र 70 पैसे से 2 रुपये होती है, जिसे जनता को 150-200 रुपये में बेचा जाता है। यह पैसा अमेरिकी कंपनियों के माध्यम से पाकिस्तान और वहां पल रहे 182 आतंकी संगठनों तक पहुँचता है, जो कश्मीर और पालघर जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।

समाधान: "गन्ने का रस, मट्ठा, दही और आम का पना पिएं। इससे देश का पैसा देश में रहेगा और समाज व्याधियों से मुक्त होगा।"

समान शिक्षा और नागरिक संहिता की मांग

शिक्षा और विकास के क्षेत्र में भारत की प्रतिभा का लोहा मानते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब देश में 'समान शिक्षा नीति' और 'समान नागरिक संहिता' (UCC) लागू की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नफरत और हिंसा के वातावरण को समाप्त करने के लिए आने वाली पीढ़ी को एक समान संस्कार और कानून की शिक्षा देना अनिवार्य है।

मुख्य अंश: जगद्गुरु के दिव्य संदेश

 गौ-सेवा: "यदि 113 करोड़ भारतीय एक-एक गाय पाल लें, तो न गौ-हत्या होगी और न ही दूध-दही की कमी।"

शक्ति की उपासना: "कलौ चंडी विनायकौ" – कलयुग में शक्ति की ही पूजा होती है, कोई भी शक्तिहीन होकर नहीं जीना चाहता।

वसुधैव कुटुंबकम्: सनातन का आधार पूरी पृथ्वी को परिवार मानना है। जब विश्व युद्ध की आग में जल रहा है, तब 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' ही शांति का मार्ग है।
स्वर्ण जड़ित अश्वमेध घोड़े के साथ निकली भव्य शोभा यात्रा
प्रेस वार्ता के पश्चात जगद्गुरु, राधा कृष्ण सेवा संस्थान ट्रस्ट के गोल्ड प्लेटेड अश्वमेध घोड़े के साथ शोभा यात्रा में शामिल हुए। हनुमानगढ़ी मंदिर से शुरू हुई यह यात्रा हिनदरी बाजार, ज्ञान बाबू चौक, मीना बाजार और छतौनी होते हुए वापस मंदिर परिसर पहुँची। यात्रा के दौरान पूरा शहर 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
इस अवसर पर समाजसेवी यमुना सिकारिया, शिक्षाविद शंभू नाथ सिकरिया सहित भारी संख्या में गणमान्य लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे।