लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: ध्यानयोग मनुष्य के जीवन का केवल एक अभ्यास या साधना मात्र नहीं है,बल्कि यह आत्मा की अमृत यात्रा है।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
साधना हमें हमारे वास्तविक स्वरूप से जोड़ती है और अनुभव कराती है कि हम केवल शरीर और मन तक सीमित नहीं,बल्कि एक असीम चेतना का अंश है।विज्ञान ने भी अब स्वीकारना शुरू कर दिया है कि ध्यानयोग की गहराई में उतरते ही शरीर और मस्तिष्क में अद्भुत बदलाव देखने को मिलते हैं।हृदय की धड़कन धीमी होने लगती,श्वास सामान्य से कहीं अधिक शांत हो जाती है और मस्तिष्क की तरंगें एक विशेष लय में व्यवस्थित हो जाती हैं।ध्यान का अभ्यास करते-करते साधक भीतर की उस ज्योति को अनुभव करने लगता है,जिसे शास्त्रों में " अंतर्ज्योति प्रकाश " कहा गया है।यही वो ज्योति है ,जो अज्ञान का अंधकार मिटाकर आत्मा को उसकी वास्तविक और आत्मिक पहचान कराती है। ध्यानयोग हमें यह सिखाता है कि संसार की परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों,भीतर की स्थिरता और शांति बनाए रखना ही सच्चा पुरुषार्थ है।ध्यानयोग का महत्व केवल शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है अपितु यह साधना आत्मा के गहन आयामों का द्वार खोलती है।जो साधक इस स्थिति को प्राप्त कर लेता है,वह न केवल स्वयं संतुलित रहता है,बल्कि अपने आस-पास भी शांति,करुणा और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण निर्मित करता है।यही कारण है कि ध्यानयोग को " जीवन का विज्ञान "
और " मोक्ष का मार्ग " दोनों कहा गया है।







